शंकरगढ़ की गौशाला मे बारिश सेअनेक गौवंशों की मौत नगरनिगम की गंभीर लापरवाही और जिम्मेदारी है

देवास (खुमानसिंह बैस) शंकरगढ़ की गौशाला मे पिछले साल बारिश,कीचड़ और भूख से गौवंशों की मौत सुर्खियों मे रही थी ।
गौशाला संचालक पर आरोप लगाकर इस पर कब्जा करने वाले आनेक असामाजिक ,राजनीतिक और सफेदपोश सक्रिय हो गये थे वहीं प्रशासन इसे अवैध होने का नोटिस देकर हटाने का प्रयास भी कर रहा था । कुमावत बाबा की सेवा और गौवंश प्रेम की प्रतीक इस गौशाला को नगरनिगम ने अपने कब्जे मे लेकर गौशाला संचालक को कर्मचारी बनाकर रख दिया ।
गुरुवार को भारी बारिश से पांच से अधिक गौवंशों की मौत कीचड़ और बारिश से हो गई और अनेक गौवंश मौत के द्वार पर खड़े थे ।
बताया जाता है की गौशाला मे बड़े शेड निर्माण का कार्य चल रहा है । और वर्तमान शेड पचास साठ गौवंशों के लिए ही पर्याप्त है । नये शेड निर्माण से गौवंशों की सुरक्षा हो सकेगी लेकिन भूख और अव्यवस्थाओं से भी गौवंशों की मौत हो रही है । नगरनिगम के प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी रामसिंह केलकर फोन पर सफेद झूठ
बोलकर कहते हैं कि एक गौवंश की मौत हुई है जबकि विडियो मे पांच से अधिक गौवंशों के शव दीख रहे हैं ।
एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि पांच सात गौवंशों की मौत प्रतिदिन हो रही है । शंकरगढ़ की पहाड़ी पर प्रशासन और नगरनिगम द्वारा करोड़ों की योजना पर कार्य करने मे गौशाला विकास की उपेक्षा स्पष्ट दिखाई दे रही है । इससे पहले भी क्षेत्र मे नगरनिगम द्वारा संचालित गौशाला से गौवंशों की अफरातफरी सामने आने और प्रचारित होने से गौशाला बंद करनी पड़ी थी । यहां भी शेड निर्माण और रखरखाव की औपचारिकता ही दिखाई दे रही है । गौवंशों की सेवा और सुरक्षा अब भी सवाल है?। अगर यह गौशाला प्रशासन और नगरनिगम के हाथों मे है तब यह सबसे सुन्दर ,सुरक्षित और सुविधाजनक गौशाला हो सकती है ।