कवि कालिदास के श्रेष्ठ साहित्य का अद्भुत संसार चित्रकला की चुनार शैली मे किया जा रहा है साकार (संयम और समर्पण से ही स्वर्णिम सफलता संभवः डॉ.योगेश्वरी फिरोजिया)

देेवास(शाकिर अली दीप/खुमानसिंह बैस) महाकवि कालिदास के श्रेष्ठ,सुन्दर और सजीव साहित्य पर आधारित वर्णागम शिविर का आयोजन 28 अगस्त से किया गया है ।कालिदास संस्कृत अकादमी, उज्जैन द्वारा महाकवि कालिदास के ऋतुसंहारम् पर केन्द्रित इस वर्णागम शिविर मे राजस्थान के सात श्रेष्ठ कलाकारों द्वारा महाकवि कालिदास की भव्य और दिव्य रितु,राग-रागिनी कल्पनाओं को प्राकृतिक ,प्राचीन परंपरानुसार बनाये रंगों से साकार किया जा रहा है ।
आयोजन 28 अगस्त से 3 सितम्बर तक देवास में किया जाकर 3 सितंबर से 55 सितम्बर तक चित्रकला प्रदर्शनी विक्मसभा कला भवन मे आयोजित की गई है ।सांस्कृतिक कला अकादमी उज्जैन की उप निदेशक डॉक्टर योगेश्वरी फिरोजिया ने बताया कि मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा महाकवि कालिदास के साहित्य पर आधारित यह शिविर इस बार देवास मे आयोजित किया गया है । यहां देवास कला विथिका के रईस खान,राजेश परमार और अन्य कलाकारों का विशेष सहयोग रहा है । हमारा उद्देश्य अपनी भारतीय संस्कृति ,साहित्य और कला की सुरक्षा सहित इसका विस्तार करना है जिसमे निरंतर सफलता मिल रही है । संयम और समर्पित साधना से ही स्वर्णिम सफलताओं के कीर्तिमान बनाये जाते हैं ।कलाकारों का प्राकृतिक रंग सयोजन चमत्कार और जादू लगता है । कलाकारों द्वारा इस कला मे वास्तविक स्वर्ण और जड़ों बूटियों सहित अन्य शाकहारी रंगों का प्रयोग महाकवि कालिदास जी की भव्य कल्पनाओं को साकार करने मे किया गया है ।
राजस्थान के जयपुर,उदयपुर ,कोटा,भीलवाड़ा और बिजोलिया के सिद्ध कलाकारों ओमप्रकाश सोनी,राजेश सोनी,शरद सोनी,मनदीप शर्मा,शरद भारती,संजीव शर्मा,प्रमोद सोनी द्वारा अरेबियन कला के भारतीय संस्करण चुनार शैली मे अद्भुत कला का प्रमाण हम देख रहे हैं और देवास के कलाप्रेमियों को भी यह आयोजन याद रहेगा । अकादमी के निदेशक डॉ. संतोष पंड्या ने बताया कि पारंपरिक, सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण मे म.प्र. शासन का संस्कृति विभाग संकल्पित है। इसी क्रम में नगर पालिक निगम देवास, देवास कलावीथिका एवं अभिरूचि कला संस्था देवास के सहयोग से पारंपरिक चुनार शैली पर आधारित वर्णागम शिविर का आयोजन किया गया । उज्जैन के प्रभारी कुलपति डॉक्टर अखिलेश पाण्डे द्वारा भी सृष्टि क्लब मे कलाकारों अपनी कृतियों को अंतिम रुप देते हुए देखकर कला साधना की सराहना की गई ।