- पीड़ित परिवार ने प्रेस वार्ता में आरोप लगाते हुए अन्य जगह आवास व मुआवजा दिए जाने की मांग की
देवास। देवास में वर्ष 1984 में शासन द्वारा पट्टे पर दी गई जमीन पर 15 फरवरी को पत्रकार शाकिर अली दीप, समाजसेवी सैयद सादिक अली के अलावा अन्य 3 परिवारों पर भी जिला प्रशासन द्वारा अतिक्रमण बताकर अलसुबह एसडीएम, तहसीलदार सहित भारी पुलिस बल द्वारा जेसीबी के माध्यम से तोड़ कर गृहस्थी का कुछ सामान छोडक़र सारा सामान, टीन शेड के चद्दर और घरेलू जरूरत के सामान को मलबे सहित भर कर ले जाया गया था। व्यथित परिवार में उस समय सिर्फ 5 लोग ही थे जो इस तत्काल कार्यवाही से स्तब्ध रह गए और जल्दबाजी में उनका अन्य कीमती सामान और दस्तावेज भी गुम हो गए।
इस संबध में पीडि़त परिवार द्वारा पत्रकार वार्ता आयोजित कर पत्रकारों के समक्ष अपनी बात रखी गई। पीडि़त परिवार की तरफ से पत्रकार शाकिर अली दीप, सैयद सादिक अली ने बताया कि जिस जगह पर हम निवास कर रहे थे। उस निवास स्थान पर हमारे परिवार को मप्र शासन द्वारा आवासीय पट्टे जारी किए गए थे। जिसमे पट्टा क्रमांक 1, और 1/1 हमारे पिताजी बाबू खां और भाई हसन अली के नाम पर था। इस जगह पर पट्टा क्रमांक 1 की भूमि पर हम दोनों के साथ एक विधवा भाभी और नाबालिक भांजी निवास करते थे। पास ही एक अन्य कमरे में मानसिक विकलांग और मूक विकलांग जीजा भी रहते थे। दूसरे वाले पट्टे की भूमि पर अलग अलग कमरों में दो अन्य विधवा भाभियां उनकी अविवाहित दो पुत्रियां रहती थी। विगत एक वर्ष में ही इस परिवार में लगातार 2 मौतें भी हो चुकी हैं। जिसके सदमे से भी परिवार बाहर नहीं आ पाया है। शासन द्वारा जारी एक अन्य पत्र में भी इन परिवारों को अन्य जगह पर बसाए जाने का उल्लेख भी किया गया है। इस संबंध में 2012 में कब्रिस्तान मुतवल्ली कमेटी ने भी संयुक्त शपथ पत्र देकर इस परिवार के यहां रहने पर सहमति व अनापत्ति जाहिर की है जो कि स्थानीय अनुविभागीय दंडाधिकारी और तहसील कार्यालय में जमा है।
पत्रकार वार्ता में बताया गया कि दिनांक 13 फरवरी को शाम 5.30 पर उन्हें कारण बताओ सूचना पत्र दिया गया जिसका जवाब आगामी कार्य दिवस दिनांक 15 फरवरी को दिया जाना था क्योंकि 14 फरवरी को शासकीय अवकाश होने के कारण जवाब दिया जाना संभव नहीं था। लेकिन कार्यालय खुलने और जवाब प्रस्तुत करने के पहले ही सुबह 8.00 बजे से एसडीएम, तहसीलदार, भारी पुलिस बल और कोटवार अपने साथ जेसीबी, डंपर लेकर आ गए घर का लाइट कनेक्शन काट दिया और कोटवार पुलिस के द्वारा घर का सामान बाहर कराने लगे। थोड़ा बहुत सामान बाहर निकाला गया और जेसीबी की मदद से पूरा घर तोड़ कर मलबा, टीन शेड अन्य जरूरत का सामान सब कुछ डंपर में भरकर ले गए। हमारे घर के अलावा पास ही निवासरत भाभी और उनकी पुत्री मय्यत में गई थीं उनका पूरी गृहस्थी का सामान भी तहस नहस कर के ले जाया गया।
प्रशासन ने 13 फरवरी को शाम 5.30 पर कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया, जिसका जवाब अगले कार्य दिवस में दिया जाना था लेकिन कार्यालय खुलने के पहले सुबह 8.00 बजे पर ही जल्दबाजी में कार्यवाही की गई, जवाब प्रस्तुत करने का समय ही नहीं दिया न ही कागज़ देखे। जब यह अनुचित कार्यवाही की गई उस समय पूरा परिसर प्रशासन द्वारा कब्रिस्तान मरघट मुख्य द्वार व साइड के छोटे गेट पर तालाबंदी में था। दिनांक 13 जनवरी 2024 से ही तहसीलदार द्वारा ताला लगाया गया था जो कि 15 फरवरी को सुबह एसडीएम द्वारा ताला तोड़ कर परिसर खोला गया। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न है कि परिवार अपना सामान कैसे बाहर निकालता? नोटिस केवल 2 लोगों के नाम से दिया गया था लेकिन पास ही निवासरत अन्य परिवार को तो सामान निकालने का समय तक नहीं दिया गया और उनका घरेलू सामान भी तहस नहस कर के ले लिया गया।
इस जमीन पर शासन द्वारा प्रशासन के माध्यम से पट्टा क्रमांक 1 और 1/1 जारी किया गया है, साथ ही एक अन्य पत्र में कहीं अन्यत्र पट्टे दिए जाने तक पट्टे की अवधि बढ़ाए जाने का भी उल्लेख है। जिस 2012 के आदेश का हवाला दिया जा रहा है उसके लिए भी एसडीएम कोर्ट में समझौता किया जा चुका है जिसमें वक्फ मुतवल्ली कमेटी के सदस्य के संयुक्त हस्ताक्षर हैं, इसके अलावा धारा 145 का दर्ज केस भी इसी समझौते के आधार पर बंद किया गया है।
प्रशासन द्वारा परिवारों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था या अन्यत्र स्थापित करने के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए, उन्हें सीधे ही प्रशासनिक ताला तोड़ कर पुलिस, कोटवार के द्वारा बाहर निकाल दिया गया। पीडि़त परिवार का प्रेस के माध्यम से प्रशासन से आग्रह है कि 65 वर्षों से इस भूमि पर रह रहे परिवार के साथ इस गलत कार्यवाही की जांच करवाने, शासकीय आवासीय पट्टे होने के बाद अनुचित तरीके से अतिक्रमण के नाम पर कार्यवाही करने की जांच करने, परिवार को न्याय दिलाने और उनको आवास स्थल और उचित मुआवजा दिलाने की व्यवस्था की जाए।

