वित्तीय अनियमितता करने के मामले में दो पटवारी गिरफ्तार, जेल भेजा

कन्नौद।देवास जिले में पिछले लगभग एक वर्ष से चर्चा में रहे मुआवजा राशि वितरण में वित्तीय अनियमितता के मामले में पहली दो गिरफ्तारी हुई है। बुधवार को सतवास पुलिस ने पटवारी बंशीलाल डाबर और अर्जुन वर्मा को गिरफ्तार किया है। हाल ही में कलेक्टर ने जिन पटवारियों की सेवा समाप्त की थी, उसमें यह दोनों भी शामिल थे। राजस्व विभाग ने पूर्ण रूप से दोषी मानकर इनकी सेवा समाप्त कर दी, जिसके महज तीन दिन के भीतर पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

बताया जाता है कि 15 जून 2023 को कलेक्टर द्वारा आदेश जारी करने के एक दिन बाद 16 जून को तत्कालीन सतवास तहसीलदार ने प्राकृतिक आपदा से बर्बाद हुई फसलों की क्षतिपूर्ति राशि वितरण में पटवारी बंशीलाल डाबर पर 462476 रुपए और पटवारी अर्जुन वर्मा पर 411068 रुपए की गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए आवेदन के माध्यम से एफआईआर दर्ज कराई थी। मामला दर्ज होने के लगभग 11 माह बाद गिरफ्तारी हुई है। सतवास टीआई आशीष सिंह ने बताया कि दोनों पटवारियों के खिलाफ कलेक्टर के आदेश पर सतवास तहसीलदार ने मामला दर्ज करवाया था। सतवास थाने पर धारा 409, 420 में प्रकरण दर्ज किया था। निलंबित होने के बाद दोनों को खातेगांव पदस्थ किया था। लंबे समय से फरार चल रहे थे। चुनाव में लगाई ड्यूटी में भी नदारद थे। 

रातातलाई व खातेगांव से किया गिरफ्तार
प्रकरण की जांच कर रहे उपनिरीक्षक अभिषेकसिंह सेंगर ने बताया कि बुधवार को हमें इनकी लोकेशन की पुख्ता जानकारी मिली थी। इसके बाद बंशीलाल डाबर को ग्राम रातातलाई और अर्जुन वर्मा को खातेगांव से गिरफ्तार किया गया है। इसके बाद कन्नौद कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया है।

यह था मामला
किसानों को मिलने वाली मुआवजा राशि के वितरण में वित्तीय अनियमितता के मामले में देवास जिले के कुल 18 पटवारियों और 2 लिपिकों को विभागीय जांच में दोषी पाया गया था। जिन पर खातेगांव, कन्नौद, सतवास और सोनकच्छ थाने में मामले दर्ज हुए। एफआईआर के बाद सभी ने एडीजे कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका लगाई थी, जो निरस्त हो गई थी। इसके बाद बंशीलाल डाबर और अर्जुन वर्मा को छोड़कर शेष सभी को हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई थी। इसलिए इस मामले में इन दोनों के अलावा किसी अन्य की गिरफ्तारी नहीं हुई।