निराशा के अंधड़ में बुझ गया साहित्य का दीप

देवास का प्रेस, साहित्य जगत शोकाकुल है, क्योंकि शाकिर अली ‘दीप’ के रूप में काव्य साहित्य, पत्रकारिता को प्रकाशमान करता एक सहज दीप निराशा के अंधड़ में बुझ गया । दीप मृदभाषी, सरल, सहज व्यक्तित्व के धनी थे, उन्होंने हमेशा साहित्य एवं पत्रकारिता के उच्च मानक को बनाए रखा । लगभग 33_34 वर्ष पूर्व राष्ट्रभाषा एवं काव्य को समर्पित साहित्य समन्वय समिति के माध्यम से भेंट हुई थी, तब से लेकर अब तक वे एक जैसे, सदाबहार ही दिखे । उनके लेखन में मौलिकता साफ झलकती थी ।

साहित्य समन्वय समिति के अध्यक्ष, गौ संरक्षण को समर्पित रहे

प्रेस क्लब के निष्ठावान सदस्य शाकिर अली दीप के लेखन में किसी भी पीड़ित के लिए न्याय, व्यवस्थापको, जवाबदारों के लिए आईना, कर्तव्य परायणता का बोध होता था । राष्ट्रीयता, सामाजिक समरसता का भाव होता था । जीवन पर्यन्त काव्य, साहित्य को समर्पित ‘दीप’ साहित्य समन्वय समिति के अध्यक्ष भी रहे । पत्रकारिता के माध्यम से ‘दीप’ ने गौ संरक्षण में भी महती, उल्लेखनीय भूमिका निभाई । वे स्वयं तो अपनी लेखनी के द्वारा गौ पालन, संवर्धन, संवरक्षण का भाव जगाते ही रहे । कभी कहीं खोजी पत्रकारिता के माध्यम से गौ वध का समाचार भी प्राप्त होता था तो गौरक्षा की दृष्टि से पुलिस प्रशासन को भी सूचित करते थे । इसलिए वे गौ वधिको को भी खटकते रहते थे ।
शाकिर अली ‘दीप’ का स्टेशन रोड़ पर गीता भवन के समीप एक छोटा सा आशियाना, झोपड़ा था । जहां वे दशकों से परिवार सहित निवास करते थे । बीते माह प्रशासन ने बिना स्थापना की व्यवस्था किए, कानून का हवाला देते हुए ‘दीप’ के दशकों पुराने उस झोपड़े पर बुलडोजर चलाकर उजाड़ दिया । ‘दीप’ निराश मन से बुझे बुझे अपने आशियाने को उजड़ते देखते रहे । प्रेस की सुर्खियां बनी, होहल्ला हुआ, लेकिन करोड़ों गरीबों को पक्का मकान दिए जाने की कारगर शासकीय योजनाओं के बावजूद ‘दीप’ के परिवार को एक आशियाने की व्यवस्था नहीं हो सकी । अंतत: साहित्यकारों, कलाकारों की भूमि से पहचाने जाने वाले देवास का सीधा सादा, फक्कड़ सरीखा काव्य, साहित्य का ‘दीप’ निराश , दुखी मन से पल, प्रतिपल बोझिल होते होते थक हारकर बुझ गया । शनिवार को भूतभावन महाकाल के धाम, उज्जैन में अपने भांजे के यहां शाकिर अली दीप ने अंतिम स्वांस ली और दुनिया को अलविदा कहते हुए कई प्रकार के प्रश्न खड़े कर गए ।

🙏🌹ॐ शांति🌹🙏
परमपिता परमात्मा उन्हें अपने चरणों में वास दे। किसी न किसी रूप में उनके काव्य, साहित्य की लौ को हमेशा प्रज्वलित रखे ।