श्री सिद्धविनायक गौसेवा आश्रम मे दस से अधिक गौवंशों की मौत के बाद सु-व्यवस्थाओं का श्रीगणेश (प्रशासन और गौसृवकों की सहयोगात्मक पहल प्रशंसनीय )

 

देवास (खुमानसिंह बैस/शाकिर अली दीप) शंकरगढ़ पहाड़ी के नीचे स्थित श्री सिद्धविनायक गौसेवा आश्रम मे कीचड़ और बारिश से दस बारह गौवंशों की मौत पर मीडिया से लेकर कुछ संगठन और राजनीतिक पार्टियों के नुमाइन्दे भी सक्रिय होकर आरोप लगाने और आक्रोश दिखाने लगे ।
एक प्रेसनोट और एक सनसनीखेज समाचार जारी करने से अच्छा यह होता कि घटना की गहराई मे जाकर समस्या का समाधान कैसे हो यह प्रयास किया जाता तो बेहतर होता लेकिन आरोपों की बारिश शुरु हो गई ।
गौवंशों की मौत और परिवहन पर बवाल करने वाले कभी गौशाला जाकर नहीं देखते कि घायल,बीमार ,कमजोर और उपेक्षित गौवंशों की सेवा और देखभाल कैसे की जाती है?, उनको भोजन कहां से मिलता है?,पानी की व्यवस्था क्या है?।
15 अगस्त को बूढ़ा गौशाला संचालक शंकरगढ़ पहाड़ी पर आने वाले प्रशासनिक अमले से लेकर प्रेस प्रतिनिधियों से भी गौशाला और गौवंशों की सुरक्षा ,व्यवस्था मे सहयोग का निवेदन कर रहा था जो कलेक्टर के पौधारोपण आयोजन मे पहाड़ी पर आये थे लेकिन किसी ने भी ध्यान नहीं दिया ।
21 अगस्त को 9-10 गौवंशों की मौत पर गौशाला मे भीड़ लग गई ।
जीतू रघुवंशी और कुछ अन्य युवक धरने पर बैठ गये । शहर कांग्रेस अध्यक्ष मनोज राजानी भी यहां पहुंच गये और गौसेवा ,सुरक्षा का दावा करने वाली भाजपा और गौभक्तों को आड़े हाथों लेकर इस बड़ी गौशाला मे व्यवस्था बनाने का अनुरोध किया ।
कुछ संगठन प्रेसनोट जारी कर जांच की मांग करने लगे और कुछ गौवंशों की मौत के जिम्मेदारों पर कार्रवाई की । मनोज राजानी की सूचना पर प्रशासनिक अमला भी आ गया और शीघ्र ही व्यवस्था का आश्वासन दिया । कलेक्टर श्री शुक्ला ने नगर निगम के इंजीनियर जितेन्द्र कुमावत को गौशाला मे गिट्टी मुरम डालकर कीचड़ समस्या समाधान के निर्देश दिये और गौशाला से कुछ गौवंशों को दूसरी गौशालाओं मे शिफ्ट भी करवाया ।
मनोज राजानी ने गौशाला मे ही संकल्प लिया कि कांग्रेस तन,मान,धन से गौशाला विकास मे सहयोग करेगी । गौशाला संचालक भी प्रशासनिक व्यवस्थाओं से संतुष्ट नजर आये ।
गणेशोत्सव के श्रीगणेश से पहले ही श्री सिद्धविनायक गौसेवा आश्रम मे कुछ बीमार,कमजोर और दुर्घटनाग्रस्त गौवंशों की मौत प्रशासनिक अमले की जागृति का कारण बने । एक दिन के समाचार और प्रचार के बाद सभी गौशाला और गौवंशों की मौत भूल गये ।
गौवंशों की वास्तविक सेवा और सुरक्षा हमारा कर्तव्य है । गौवंशों की मौत पर जांच कार्रवाई को छोड़कर यहां गौवंशों की सेवा सुरक्षा निश्चित करना जरुरी है ।