देवास,,( खुमान सिंह बैंस)।मध्य प्रदेश शासन मत्स्य विभाग वर्तमान में मत्स्य उद्योग को बढ़ावा देने के लिए मछुआरा समुदाय के साथ-साथ मत्स्य पालन में रुचि रखने वाले परिवारों को अलग-अलग प्रकार की सहायता प्रदान करते हुए आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयास रत है । लेकिन पुरानी समितियां को लेकर कई स्थानों पर वर्षों से चले आ रहे विवाद सुलझा नहीं पा रहे हैं। जिस कारण वर्ष भर जलमग्न रहने वाले बड़े जलाशय में से भी मत्स्य उत्पादन बहुत कम निकल रहा है और उनसे जुड़ी पट्टाधारी समितियां को समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा। ऐसे ही मामले में देवास जिले के बड़े जलाशयों में शामिल कोठी माता महीगांव बांध का मामला सामने आया है। यहां पर 2007 में मत्स्य पालन के लिए स्थानीय तौर पर मछली पालन करने के लिए 22 सदस्यों की एक समिति बनाई गई। इस समिति में उन लोगों को प्राथमिकता दी गई जिन लोगों की जमीन तालाब निर्माण में जलमग्न हो गई। कालांतर में 10 वर्ष के बाद नवीन समिति का पट्टा होना नियम अनुसार उचित था। लेकिन पूर्व विधायक के हस्तक्षेप के चलते इसी समिति में फेर बदल करते हुए कुछ सदस्यों को बगैर सूचना के हटा दिया गया और कुछ नए सदस्यों की अनुशंसा कर उन्हें शामिल कर दिया। हालांकि समिति के सदस्यों ने इस बात से इनकार किया है कि उन्होंने पुरानी समिति में कोई फेरबदल किया। गांव के सरपंच प्रतिनिधि संतोष अवलासिय ने बताया कि गांव में और भी लोग है जो मत्स्य पालन में रुचि रखते हैं। विशेष कर मानकर परिवार जिनकी पारिवारिक संख्या एक दर्जन से अधिक है। वह लोग भूमिहीन होकर नितांत गरीबी में जीवन व्यापन कर रहे हैं और वर्ष के 8 माह गुजरात जैसे क्षेत्र में जाकर मजदूरी करने को विवश है। इस हिसाब से समिति सदस्यों में जो सदस्य आर्थिक रूप से मजबूत है उनकी जांच करते हुए उन्हें हटाकर वास्तविक लोगों के नाम समिति में जोड़े जाएं। या फिर समिति सदस्यों की संख्या भी बढ़ाई जा सकती है। विश्व स्वास्थ्य सूत्रों की माने तो तालाब का विस्तारीकरण 200 बीघा से अधिक है। जिसमें वर्ष भर पानी रहता है और उचित तरीके से मत्स्य पालन किया जाए तो 40 लाख रुपए से अधिक का मछली उत्पादन आसानी से किया जा सकता है। जिसके चलते समिति के सभी सदस्यों को अच्छा रोजगार मिल सकता है। लेकिन विगत 2 वर्षों से आपसी विवाद के चलते तालाब में मछली बीज भी नहीं छोड़े गए और ना ही बड़ा उत्पादक सामने आया। स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि इस तालाब में 30 से 40 किलो तक की मछली देखी गई है। यदि उच्च कोटि का प्रशिक्षण देकर इस समिति को मछली पालने के लिए प्रोत्साहित किया जाए तो 30 से 40 परिवारों की गुजर बसर हो सकती है। मत्स्य विभाग के अधिकारियों से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि वर्तमान में पंजीकृत संस्था पुरानी ही है उसमें फेर बदल नहीं हुआ है और उसकी जांच का कोई कारण नहीं है। जबकि कुछ लोगों ने समिति के नवनी करण करने के लिए बार-बार पत्र लिखकर मत्स्य विभाग को अपात्र सदस्यों की सूची बनाकर हटाने के लिए कहा है। इस संबंध में बागली जनपद भी इसी दिशा में काम कर रही है जिस दिशा में उन्हें पूर्व विधायक समझा कर गए थे। उन्होंने भी इस सूची में फेर बदल की बात से मुंह फेर लिया है।
अध्यक्ष सुमित्रा बाई इस मामले में कुछ नहीं बता पाइ
इस संबंध में वर्तमान मत्स्य पालनपुर पट्टाधारी समिति की वर्तमानअध्यक्ष सुमित्रा बाई से विगत वर्ष की समिति के सदस्यों की लिखित जानकारी जानना चाही तो उन्होंने कहा कि उनके पास कोई लेखा-जोखा नहीं है किसी अन्य सदस्य का नाम बताते हुए कहा कि सब हिसाब किताब उनके घर पर रखा हुआ है उन्हें भी वीगत 2 वर्षों से बचत का कोई भी हिस्सा नहीं दिया गया है। कितनी बचत हुई कितना खर्च हुआ या हिसाब किताब दूसरा ही सदस्य रखता है।

