जिस घर में मां भगवती की उपासना होती है, उस घर के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं- पंडित अजय शास्त्री

देवास। माताएं भगवती स्वरूप होती है। वह घर में सबको एकसूत्र में बांध करके रखने का प्रयास करती है। परमात्मा का स्मरण करती है, कि अब मेरा परमात्मा ही सहारा है। बेटी एक पिता का सबसे बड़ा सहारा होता है। रक्षाबंधन में भाई के हाथ मे रक्षा सूत्र बांध कर आती है। माता-पिता है या नही है। लेकिन बेटियों को विस्वास होता है की मेरा भाई तो आज भी है। जो मेरी रक्षा करने को तैयार है। यह विचार रामी गुजराती माली समाज धर्मशाला बड़ा बाजार चोपड़ा में चल रही देवी पुराण कथा के छठे दिन व्यास पीठ से पंडित अजय शास्त्री सिया वाले ने प्रकट किए। उन्होंने आगे कहा कि बेटियां कोई साड़ी की भूखी नहीं होती है। उसके लिए भाई ही सबसे बड़ा गहना, उसकी संपत्ति है। बेटियां एक पिता का अभिमान और सम्मान होती है। पिता की जान होती है बेटियां। लेकिन आज के समय में इन बेटियों का मान सम्मान खत्म होता जा रहा है। आज संसार में चारों तरफ पाप फैला हुआ है। बेटियों को अपने कुल की मर्यादा और संस्कारों के खिलाफ कभी नहीं जाना चाहिए। जिसने भी बिना जाने, बिना सोचे समझे प्रेम विवाह किया है उनका भविष्य अधिक्तर संकट में ही पड़ा है। इसलिए अंधे और झूंठे प्रेम में पड़कर के अपने जीवन को खराब मत करना। बाबुल कौन है जिन्होंने पाल पोस करके बड़ा किया वह बाबूल है। पिता कहता है की बेटी तुझे संस्कार में रहना है। क्योंकि तु मेरा खून है। तू हमारे परिवार रूपी बगिया का फूल है। आज हम देवी देवताओं को लक्ष्मी को शक्ति को पूजते है, माता दुर्गा, मां चामुंडा को पूजते है। सभी देवियों को तो पूजते है। लेकिन हमारे घर की लक्ष्मी का हम अनादर कर रहे है। आज कई घरों में स्त्रियों का अपमान हो रहा है। उन्हें प्रताड़ना दी जा रही है। जबकि वह स्त्री भी कोई साधारण स्त्री नहीं है। वह भी साक्षात् देवी स्वरूप में है। जिस घर में स्त्री का अपमान होता है उस घर के लोग कभी सुखी नहीं रह सकते। जिस घर में माता की उपासना होती है। उस घर के सारे कष्ट, सारे रोग खत्म हो जाते है। आयोजक मंडल रामी गुजराती माली समाज बड़ा बाजार द्वारा व्यास पीठ की पूजा अर्चना कर महा आरती की। सैकड़ो धर्म प्रेमियों ने कथा श्रवण का धर्म लाभ लिया।