आने वाला वर्ष खुशियो और सुख-समृद्धी से भरपूर होगा
हाटपिपल्या मे भगवान नृसिंह मंदिर से भविष्यवाणी
(भमोरी नदी मे तीन बार पाषाण मूर्ति का तैरना शुभ संकेत )
देवास (खुमानसिंह बैस/शाकिर अली दीप) भगवान नृसिंह की नगरी हाटपिपल्या मे हर वर्ष डोल ग्यारस पर भगवान की साढ़े सात किलो पाषाण प्रतिमा को हजारों श्रद्धालु ,भक्तो,दर्शकों और मीडिया के सामने भमोरी नदी मे तीन बार मंदिर के पुजारी द्वारा तैराया जाता है ।पाषाण प्रतिमा का तीन बार तैरना अति शुभ माना जाता है और आने वाले वर्ष मे सुख-समृद्धी ,खुशियां और पर्याप्त वर्षा का संकेत होता है ।
प्रतिमा एक बार तैरना सामान्य , दो बार तैरना कुछ ठीक और तीन बार तैरना अति शुभ होता है ।
यह प्रतिमा अगर तीनों बार नहीं तैरती है तब आने वाला वर्ष शुभ नहीं होता ऐसी मान्यता वर्षों से चली आ रही है ।
प्रतिमा तैराने के लिये एक दिन पहले तक नदी मे पानी आ ही जाता है । हाटपिपल्या का यह चमत्कार प्रदेश और देश मे प्रसिद्ध है ।
इस वर्ष कोविड-19 कोरोना वायरस संक्रमण के कारण हजारों श्रद्धालु और दर्शकों की उपस्थिति नहीं रही ।
प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी डोल ग्यारस पर्व पर शनिवार को शाम पांच बजे नृसिंह घाट भमोरी नदी पर साढ़े सात किलो वजनी पाषाण प्रतिमा पानी में तैराई गई जो की तीन बार ही तैरती रही । मंदिर समिति द्वारा आरती कर डोल मे भगवान की पाषाण प्रतिमा लेकर कुछ भक्तगण नृसिंह घाट पहुंचे जहां पर पुजारी द्वारा नदी की पूजा अर्चना की गई । पंडित विष्णुदास वैष्णव द्वारा पाषाण प्रतिमा को नदी में तीन बार छोड़ा गया जिसमें तीनों बार ही मूर्ति तैरती रही ।
याद रहे कोविड-19 कोरोना वायरस संक्रमण के चलते इस वर्ष शासन प्रशासन के निर्देशानुसार फिजीकल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए यह पाषाण प्रतिमा भमोरी नदी पर स्थित नृसिंह घाट पर मंदिर समिति के सदस्यों की उपस्थिति मे पुजारी द्वारा नदी में तैराई गई । मंदिर के पुजारी द्वारा घोषणा की गई कि आने वाला वर्ष सुख-समृद्धी कारक ,शांतिपूर्ण और आनंददायक रहेगा ।

