भारतीय संस्कृति मे सेवा और भक्ति सर्वोपरि मुनि प्रतीक सागर जी ने पत्रकारों से की महती चर्चा (पत्रकारिता श्रेष्ठ विचारों के विस्तार का सशक्त माध्यम )

देवास(खुमानसिंह बैस/शाकिर अली दीप) भारतीय संस्कृति मे सेवा और भक्ति ही प्रसन्नता का आधार है..हमारे देश के दिव्य वातावरण मे प्रेम,दया, सहयोग और सद्भावना अपार है… यहां गुरुओं की वाणी मे अमृत की धार है जो करती सबका उद्धार है… मुनिश्री गणाचार्य पुष्पदंत सागर जी महाराज के सुयोग्य ,श्रेष्ठ और सिद्ध शिष्य क्रांतिवीर मुनि प्रतीक सागर जी महाराज ने यह प्रेरक विचार पत्रकारों के बीच व्यक्त किये । मुनि प्रतीक सागर जी ने प्रेस को प्रचार और ख़बरों के विस्तार का शक्तिशाली माध्यम मानते हुए कहा कि प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया विचार और वातावरण परिवर्तित करने वाले माध्यम हैं इनका सदुपयोग होना चाहिएं । आपने कहा कि राजनीति मे राज रह गया है नीति गायब है । आपने गुरुभक्ति को सफलता ,प्रसन्नता और सुख-समृद्धी का प्रमुख कारण बताते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और संस्कारों की शिक्षा जरुरी है तभी हम पुन: विश्वगुरु के आसन पर आसानी से विराजित हो सकते है । आपने किसानों को भारत की जड़ बताते हुए कहा कि किसान मजबूत तो देश मजबूत । सरकार को किसानों की बात मान लेना चाहिये । मुनि श्री ने प्रेम,भक्ति ,सेवा,सद्भावना और समर्पण के अनेक उदाहरण देकर कहा कि विश्व मे भारतीय संस्कृति और संस्कार ही श्रेष्ठ हैं । आपने कहा कि सभी धर्म प्रेम,सहयोग और सेवा का पथ प्रशस्त करते हैं । वर्तमान समय मे प्रेस की भूमिका निर्णायक है इसलिए इसे सकारात्मक प्रकाशन और -प्रसारण करना चाहिये । मुनिश्री प्रतीक सागर जी ने भक्ति की शक्ति को श्रेष्ठ बताया और कहा कि जिसके पास योग,सहयोग ,सद्भावना और सेवा का धन है वह संसार का सबसे सुखी और संतुष्ट परिवार है । आपने सभी पत्रकारों को 2021 की शुभकामनाओं सहित आशिर्वाद देकर सम्पूर्ण विश्व और प्राणियों के लिए मंगल कामनाएं की । मुनिश्री प्रतीक सागर जी सात माह बाद अपने पूज्य गुरुवर का सानिध्य प्राप्त कर दर्शन करेंगे । मुनिश्री सोनागिरि से लगभग 500 किमी की यात्रा तय कर 1जनवरी को सोनकच्छ के तीर्थक्षेत्र पुष्पगिरी पहुंचेगे।