महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान वाले मुख्यमंत्री के दावे देवास मे चिकित्सा पुलिस और प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के सामने तोड़ रहे हैं दम ?(शिकायत करने वाली महिला सुरक्षाकर्मियों को आरोपी पक्ष ने किया कार्यमुक्त )प्रताड़ित अब जाऐंगी विधायक गायत्रीराजे पवार की शरण मे

देवास (खुमानसिंह बैस/शाकिर अली दीप) मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान महिलाओं को बहन और उनके बच्चों को भान्जा भान्जी मानकर उनकी सुरक्षा ,सम्मान ,सहयोग ,सेवा के वादे-दावे करते नहीं थकते और समय समय पर प्रशासनिक ,पुलिस अधिकारियों को इस संबंध मे निर्देशित भी करते रहते हैं लेकिन मां चामुण्डा की नगरी देवास मे मुख्यमंत्री भैया मामा के दावे,वादे और निर्देश दमदार नहीं हैं । देवास का जिला,पुलिस और चिकित्सा प्रशासन मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के निर्देशों के प्रति गंभीर नहीं लापरवाह भी साबित हो रहा हे । देवास के महात्मा गांधी जिला चिकित्सालय मे निजि ठेकेदार के शराबी और अय्याश कथित सुपरवायजरों द्वारा पहले महिला सुरक्षाकर्मियों से मोबाइल पर दोस्ती का दबाव बनाया जाता है फिर दूसरी गार्ड से भी दोस्ती और संबंध बनवाने की बात की जाती है । मना करने पर नौकरी मे परेशान और बदनाम करने की धमकी मिलती है । सीएमएचओ को मौखिक शिकायत करने पर लिखित मे शिकायत को कहा जाता है । लिखित मे शिकायत सीएमएचओ सहित कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से करने के बाद शिकायतकर्ताओं पर दबाव बनाना शुरु कर दिया जाता है । अखबारों मे ख़बरों के प्रकाशन और सोशल मीडिया पर प्रसारण के बाद महिला एस आय कृष्णा सूर्यवंशी शिकायतकर्ताओं को बुलाकर धमकाती हैं और कहती हैं तुम सुरक्षाकर्मियों का कार्य ही क्यों करती हो?, तुमने पुलिस मे शिकायत क्यो की?,अपने ठेकेदार या अस्पताल प्रबंधन को शिकायत करनी थी,हम क्या कर सकते हैं? , मैं ठेकेदार को लिखती हूं की तुम्हें नौकरी से हटा दे । जिस प्रमाणित शिकायत के बाद शराबी सुपरवायजर और उन्हे संवरक्षण देने वालों पर प्रकरण दर्ज होना था उस शिकायत के बाद महिला पुलिस अधिकारी कृष्णा सूर्यवंशी के कथनानुसार दो महिला गार्डो को नौकरी से निकाल भी दिया गया । जिला चिकित्सालय की इस शर्मनाक घटना पर ठेकेदार का ठेका निरस्त होना था वहां सिविल सर्जन इसे छोटीमोटी छेड़छाड़ है चलती रहती है कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं । कलेक्टर के यहां की गई शिकायत पर ध्यान ही नहीं दिया जाता । प्रशासन अपनी और शासन की सफलताओं के प्रचार तो करता है लेकिन सच्चाई डरावनी है । जिला चिकित्सालय की सिक्युरिटी गार्डो से शराबी सुपरवायजरों द्वारा अश्लील बाते करने और धमकाने वालों पर कोई कार्रवाई न होना और शिकायतकर्ताओं को नौकरी से हटा देना महिला सुरक्षा और सम्मान के दावे की पोल खोल देता है । कार्यालयों , संस्थाओं , शासकीय और निजि संस्थानों मे महिला उत्पीड़न पर कार्रवाई करने वाली समितियां कागजों और प्रचार मे ही दिखाई दे रही हैं ,महिला पुलिस महिलाओं से अश्लीलता करने वालों की वकालत मे नजर आती है और ठेकेदार पक्ष प्रताड़ित महिलाओं मे से दो को नौकरी से निकाल देता है ? यह है मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान का सुशासन? । देवास जिला चिकित्सालय कार्यरत महिला सुरक्षाकर्मियों के शराबी सुपरवायजर उन्हे गन्दे आमंत्रण देकर भी कार्रवाई से सुरक्षित रहते हैं और फरियादी महिलाओं को नौकरी से हटा दिया जाता है । क्या किसी भी तरह की महिला प्रताड़ना की शिकायत करना गलत है? और पुलिस महिलाओं की प्रमाणित शिकायत पर कार्रवाई के लिये है या आरोपियों के पक्षा मे? । कलेक्टर ,एस पी और सीएमएचओ से शिकायत के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई न होने और नौकरी से हटा देने पर मायूस, प्रताड़ित महिला सुरक्षाकर्मी अपनी फरियाद लेकर अब देवास विधायक गायत्रीराजे पवार से भी मिलने वाली हैं । इस संबंध मे नौकरी से बंद करने का मौखिक आदेश देने वाले धीरेन्द्रसिंह द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया । देखना यह है कि पीड़ित महिला सुरक्षाकर्मियों को मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के सुशासन मे न्याय कौन दिलाता है?और आरोपियों पर कार्रवाई कौन अधिकारी करते है?