————पत्रकार शकील खान, समाजसेवी सुमेर सिंह दरबार, संजय दायमा ने भी किया भरपूर सहयोग———– रईस शेख ने रोजे की हालत में उठाए लकड़ी और कंडे———बेटी बोली- मेरा कोई भाई नहीं था-आप सभी मेरे भाई-ईश्वर आप जैसे भाई सभी को दे, नम हुई आँखें————देवास, 18 अप्रैल 20221/ देवास शहर के 0/1 राधागंज स्थित स्व.सुखदेव पाटीदार के घर सुबह से ही सन्नाटा पसरा हुआ था। दरसअल 68 वर्षीय सुखदेव पाटीदार का रविवार देर शाम को निधन हो गया था। पत्नी और छोटी बेटी के सामने उन्होंने देखते ही देखते दम तोड़ दिया… साँसें कम थम गई पता ही नहीं चला।इसके बाद देर रात उनका शव जिला अस्पताल में रखवाया गया।क्योंकि घर पर पत्नी और बेटी के अलावा संभालने वाला कोई नहीं था। कोरोना के खौफ के मारे पड़ोसी घरों में दुबके हुए थे।ऐसे में ख़बर लगते ही शकील खान सहित पत्रकार साथी सक्रिय हुए। वहीं ख़बर लगते ही सांसद श्री महेंद्र सिंह सोलंकी भी पाटीदार जी के निवास पहुंच गए थे। शव को सभी के प्रयासों से जिला अस्पताल भिजवाया गया,घर को सेनेटाइज करवाया गया।। ताकि बदहवास, विलाप कर रही पत्नी और छोटी बेटी की रात कट जाए।आपको यह बता दे कि स्व.पाटीदार के दो बेटियां है, दोनों की शादी हो गई, बेटा नहीं। ऐसे में उनकी तबियत ख़राब हुई तो देखने वाला बेटी रोशनी के अलावा कोई नहीं था। उनके मन्दसौर निवासी दामाद सोनाक्ष पाटीदार ने शकील खान से बात की।शकील खान ने उनकी घर पर टीम भेजकर कोविड-19 RT PCR सैम्पल भी शनिवार करवाया था।जिसकी रिपोर्ट अभी नहीं आई। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। चिर निंद्रा में सौए हुए स्व. पाटीदार की पत्नी और छोटी पुत्री रोशनी विलाप कर रही है… अनंत विलाप सिर्फ आस पड़ोस के लोग दूर से देख कर अपने घरों में दुबकते जा रहे। कोई ढांढस बंधाने वाला नहीँ…कोई आगे नहीं आया कि सुबह हम अंतिम संस्कार करेंगे।या हम आपके साथ चलेंगे।ख़ैर, पाटीदार जी के मन्दसौर निवासी दामाद सोनाक्ष पाटीदार का कॉल पत्रकार शकील भाई के पास आता है कि सुबह अंतिम संस्कार कैसे होगा ? घर में मेरी सांस और पत्नी के अलावा कोई नहीं। मेरे कोई साले भी नहीं। ऐसे में शकील भाई ने अपने साथियों के साथ अंतिम संस्कार की सामग्री जुटाने और पूरे विधि विधान से अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया। परिवारजनों को ढांढस बांधकर हिम्मत दिलाई… और फिर शकील खान फरिश्ता बन कर अपने साथियों सुमेर सिंह दरबार(समाजसेवी),पूर्व पार्षद संजय दायमा ,पत्रकार रईस शेख और सुरेंद्र बांगर पाटीदार परिवार की आस बन कर देर रात से ही अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुट गए। सभी साथियों ने मिलकर अपने-अपने स्तर पर सारी सामग्री जुटाई। ताकि पूरे विधि विधान से अंतिम संस्कार हो। कोई कोर कसर नहीं रहे। इस दौरान रईस शेख भी रोजे की हालत में दिन रात जुटे हुए है तथा अंतिम संस्कार स्थल पर लकड़ी, कंडे एकत्रित कर, अंत्येष्टि स्थल में जमाने में सहयोग दिया।उल्लेखनीय है कि सुखदेव जी की केवल दो पुत्रियां मात्र है जिसमें एक विदिशा और दूसरी मंदसौर में निवासरत है। घर में कोई करने वाला नहीं… हताश मां-बेटी का विलाप कर बुरा हाल था।उन्हें संभालने वाला भी कोई नहीं। शकील शेख, रईस शेख,सुमेरसिंह दरबार, संजय दायमा की टीम सुबह जल्दी जिला अस्पताल पहुंची ।जहां जिम्मेदारों से मोबाइल पर बातचीत कर आवश्यक कार्यवाही पूरी कर स्वर्गीय पाटीदार के शव को श्मशान तक लेकर गए।जहां पूरे विधि विधान के साथ उनकी छोटी बेटी रोशनी ने अपने पिता को मुखाग्नि देकर उनका अंतिम संस्कार किया। कोविड 19 जैसी भयानक महामारी के इस दौर में आज जहां इंसान कि सांसों का चाहे जब टूट जाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। वहां इंसानियत के फरिश्ते और मानवता आज भी ऐसे कर्म करवाकर समाज को बेहतर संदेश देने का काम कर रही है….शकील भाई लगातार पूरे समय फील्ड में रहकर अपने साथियों के साथ आमजनों की मदद करते आये है। लगातार इस मंजर में अपने आपको झोंक कर लोगों की सेवा कर रहे है उनके इस कार्य से अनेक लोगो के लाभ भी मिल रहा है। उनके साथी सुमेर सिंह दरबार और संजय दायमा उनका कंधे से कंधा मिलाकर पूरा सहयोग कर रहे है।

