
देवास(खुमानसिंह बैस) प्राइम हॉस्पिटल से प्रारंभ रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी का मामला अव्यवस्थाओं और मनमानी के लिए चर्चित अमलतास हॉस्पिटल तक जा पहुंचा है। कोतवाली पुलिस ने कालाबाजारी मामले से जुड़े मुख्य सरगना लोकेन्द्रसिंह राजपूत निवासी ग्राम लुकमड़ी थाना पीपलराँवा जिला देवास को गिरफ्तार किया तब लोकेन्द्र ने अमलतास हॉस्पिटल के कर्मचारी वीरेंद्रसिंह पवार का नाम बताया जिसने अमलतास हॉस्पिटल की दो नर्सों से इंजेक्शन लेकर लोकेन्द्र और प्राइम हॉस्पिटल के कर्मचारी अंकित और पूजा को उपलब्ध करवाए। इन लोगों ने इसे फायदा मेडिकल संचालक रूद्र को बेचे। पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया है। अब पुलिस को अमलतास अस्पताल के एक मेल और फीमेल नर्स की तलाश है जो अस्पताल से इंजेक्शन निकाल कर वीरेंद्र को देते थे। स्वंय काे महात्मा गांधी जिला चिकित्सालय का डाॅक्टर बताने वाले लाेकेंद्र से कथित कड़ी पूछताछ के बाद वीरेंद्र का नाम सामने आया है, जाे कि अमलतास में काम करता है । काेतवाली पुलिस ने इसे भी गिरफ्तार कर लिया है। काेतवाली निरीक्षक उमराव सिंह के मुताबिक कड़ी पूछताछ के बाद लाेकेंद्र ने कई सनसनीखेज राज उगले हैं जिन पर जांच की जा रही है। दाे नर्साें के नाम भी सामने आए हैं। एक युवक वीरेंद्र पिता विक्रम सिंह पंवार उम्र 21 साल निवासी न्यू हाउसिंग बाेर्ड काॅलाेनी देवास काे भी गिरफ्तार कर लिया गया है। बताया जाता है समाज और देश के दुश्मनों के कालाबाजारी नेटवर्क के वीरेन्द्र ने अमलतास हास्पिटल की नर्साें से 14-14 हजार रुपए में खरीदे थे इंजेक्शन ।पुलिस के मुताबिक वीरेंद्र ने बताया है कि उसने नर्साें से दाे इंजेक्शन 14-14 हजार में खरीदे और 16 से 17 हजार में लाेकेंद्र और अंकित काे उपलब्ध करवाए। बताया जा रहा है कि फिर लाेकेंद्र और अंकित ने यह इंजेक्शन 22-22 हजार में बेचे हैं। अस्पताल से कैसे बाहर निकले इंजेक्शन ?कोतवाली पुलिस के मुताबिक इंजेक्शन अमलतास से कैसे बाहर आए इसकी जाँच की जा रही है। अमलतास हास्पिटल संचालक उपर तक पकड़ रखते हैं और यहां की अनेक मौत,लापरवाही और मनमानी की जांच ठण्डे बस्ते मे पड़ी हैं । बताया जाता है कि जिला अस्तव्यस्त मे भी अमलतास हास्पिटल के दलालों का बड़ा नेटवर्क है ।पिछली कोरोना प्रेसवार्ता मे कलेक्टर चन्द्रमौली शुक्ला ने कहा था अमलतास संचालक भदौरिया मेरे मित्र हैं मैं कहूंगा की जांच कम से कम मे हो ।मतलब कलेक्टर के मित्र की जांच का स्वरुप क्या हो सकता है यह समझा झा सकता है ।अमलतास से जो इंजेक्शन बाहर लाकर कालाबाजारी की जा रही थी वह संभवतः कई मरीज जो कोरोना के चलते मौत का शिकार हुए ,उनके नाम के इंजेक्शन इन नर्सों ने निकाले होंगे, यह भी हो सकता है की मरीजों को इंजेक्शन न लागते हुए उन्हें बेच दिया गया और मरीज मौत का शिकार हो गये । सभी बिन्दुओं पर जांच की जा रही है लेकिन जांच अपने लक्ष्य तक जाएगी इसमे संदेह व्यक्त किया जा रहा है ।इस बीच अमलतास हास्पिटल द्वारा अपनी सफलताओं और उपलब्धियों का विज्ञापन जारी करना अपनी अव्यवस्थाओं और मरीजों के जीवन से खिलवाड़ पर परदा डालना भी चर्चित हो रहा है ।रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वाले इस गिराेह में अभी सिर्फ पांच नाम ही सामने आए हैं। पुलिस के मुताबिक पूछताछ के बाद अभी और कई के नाम सामने आ सकते हैं । इस संबंध मे पुलिस अधीक्षक द्वारा पत्रकारवार्ता मे भी कुछ जानकारी दी गई थी लेकिन जांच मे बड़े बैनर आने के बाद गति धीमी होकर उसके प्रभावित होने की बात भी चल रही है ।पुलिस द्वारा जल्दी ही कुछ और गिरफ्तारी की बात भी की जा रही है ।कैसे खुला पूरा मामला ?दरअसल 2 मई काे पुलिस काे मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक लड़की 27 हजार में रेमडेसिविर बेच रही है। पुलिस ने खुद मरीज का अटेंडर बनकर नर्स पूजा और अंकित से इंजेक्शन खरीदे और दाेनाें काे रंगे हाथाें गिरफ्तार किया। दाेनाें से पूछताछ के बाद रुद्र का नाम सामने आया। इसके बाद पूजा और रुद्र काे ताे जेल भेज दिया पर अंकित काे पुलिस ने एक दिन के रिमांड पर और रखा । उससे जब पूछताछ की गई ताे लाेकेंद्र का नाम सामने आया, लाेकेंद्र काे पुलिस ने गिरफ्तार किया ताे वीरेंद्र का नाम सामने आया, अब वीरेंद्र की गिरफ्तारी के बाद दाे नर्साें के नाम सामने आए हैं, जिनकी गिरफ्तारी हाेना है। पुलिस लोकेन्द्र पर रासुका लगाने की भी तैयारी कर रही है । इस मामले की निष्पक्ष और गहरी जांच मे मरीजों को मारकर उनके हिस्से का इंजेक्शन बैचने वाले मौत के सौदागर सहित लापरवाह अस्पताल प्रबंधन पर भी कड़ी कार्रवाई जरुरी है । फिर भी जनता द्वारा पुलिस की कार्रवाई सराहनीय बताई जा रही है ।

