जनप्रतिनिधियों से उठ गया जनता का विश्वास जनहित मे नहीं कर रहे प्रभावी पहल और प्रयास(अव्यवस्थाओं के चक्रव्यूह मे लाचार आमआदमी)

देवास(खुमान सिंह बैंस) एक साल से अधिक समय मे भी कोविड-19 के संक्रमण का विस्तार रोकने मे असफल जिम्मेदार अब जनता पर लगातार कर्फ्यू और लॉकडाउन थोपकर कभी चेन तोड़ने का प्रचार करते हैं और कभी नियंत्रण का । लगातार लॉकडाउन से कोविड-19 की कड़ी तो नहीं टूटी ,आमआदमी और छोटे दुकानदारों की कमर टूट गई है । क्राइसिस कमेटी के सदस्य सांसद और विधायक आमआदमी की परेशानियों से अनजान लॉकडाउन बढ़ाने की सहमति देते समय यह भूल जाते हैं कि मध्यमवर्गीय किराना और जरुरी चीजों की कहां से और कैसे व्यवस्था करेगा ?। प्रशासनिक-पुलिस अधिकारियों को भी घरेलु सामान आसानी से मिल जाता है ,उन्हें आमआदमी की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं होता । शासन की इच्छा के अनुरुप कार्य करना इनके लिए आवश्यक है । प्रशासनिक-पुलिस उदासीनता का भरपूर फायदा उठा रहे हैं आवश्यक सामान की कालाबाजारी करने वाले,कमिशनखोर और दलाल । जनता कह रही है कि किराना,सब्जी और दूध सहित दवाईयों की कालाबाजारी रोकने मे नाकाम प्रशासन जनता को ही हर तरफ से निशाना बना रहा है । जनप्रतिनिधियों को मौत और भय के माहौल मे उद्घाटन के फीता काटते फोटो और सशुल्क ऑक्सीजन देने के प्रचार सहित फेसबुक पर लाइव आकर खुद को जनसेवक बताने का समय मिल रहा है लेकिन जनता की परेशानियों समझने का नहीं । कुछ मरीज अमलतास और अन्य अस्पतालों मे लाखों रुपये इलाज मे लगाने के बावजूद मर रहे हैं,सामान्य और गरीब इलाज के अभाव और अव्यवस्थाओं के चक्रव्यूह मे दम तोड़ रहे हैं । इन्जेक्शन की कालाबाजारी के तार अमलतास हास्पिटल और प्राइम हास्पिटल से जुड़े होना प्रमाणित होकर दो नर्सों सहित छह अन्य सहयोगी जेल भेज दिये गये हैं । मामले मे बड़े आरोपियों को बचाने की जनचर्चा के बीच अस्पतालों मे अव्यवस्थाओं और मनमानी राशि लेने की शिकायत लगातार सामने आ रही हैं । जांच मे एसडीएम प्रदीप सोनी ने पाया कि प्राइम हास्पिटल मरीजों से मनमानी राशि वसूल रहा है । अपेक्स केयर हास्पिटल मे पेट दर्द के मरीज को रात मे भर्ती कर 15 हजार रुपये जमा करवाए जाते हैं और सुबह तक कोई इलाज नहीं किया जाता । मरीज जब सुबह परिजनों को यह बात बताकर छुट्टी लेकर दूसरे अस्पताल जाने की बात करता है तब दो हजार रुपये और जमा करने की बात पर पुलिस और पत्रकार भी पहुंच जाते हैं । पुलिस और प्रेस के कारण मरीज को 16 हजार वापिस किये जाते हैं । अपेक्स हास्पिटल की अवैध वसूली और मनमानी राशि लेना प्रमाणित होने के बावजूद ईस पर प्रशासन-पुलिस कार्रवाई न होना अप्रत्यक्ष सहयोग ही प्रमाणित करता है । जिला चिकित्सालय मे भी सेवा के नाम पर प्रचार चर्चा मे है ।कुछ बड़े अस्पतालों के दलाल और एजेन्ट डॉक्टर सामान्य मरीजों की भी जांच लिखकर उन्हें आर्थिक रुप से लूटकर,मानसिक रुप से डराकर बड़े अस्पतालों मे भर्ती होने के लिए मजबूर कर रहे हैं । सामान्य दवाईयों और रोजमर्रा की चीजों के मानमाने दाम लिए जा रहे हैं । जनता का कहना है कि शासन प्रशासन रेड और ओरेंज जोन चिन्हित कर वहां बंद रख सकता है लेकिन पूरे शहर और जिले को सख्ती से बंद रखना मनमानी है ।विपक्ष भी प्रेस विज्ञप्ति मे सिमटकर रह गया है और न्यायालय भी संज्ञान नहीं ले रहा । अब जनसमस्याओं का समाधान हो तो कैसे हो?