देवास (खुमानसिंह बैस) मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा माफियाओं को दस फिट जमीन मे गाड़ देने की चेतावनी के बावजूद भी मुरैना,उज्जैन और मन्दसौर मे जहरीली शराबा आसानी से बाक रही है ,पीने वाले अकाल मौत मर रहे हैं वहीं पुलिस और आबकारी अमले की कार्रवाई मे निरंतर अवैध शराब और महुआ लहान,जहरीला तरल (फार्मूला ) मिलना इस कारोबार के विस्तार का प्रमाण है ।
आबकारी मंत्री के गृह जिले मन्दसौर मे जहरीली शराब से सात आठ व्यक्तियों की मौत और अनेक प्रभावित होने के बाद पुलिस-आबकारी अमला प्रदेश शासन सहित वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार सक्रिय होकर कच्ची शराब बनाने और बैचने वालों पर कार्रवाई करता नजर आ रहा है ।
वैसे तो देवास के पांचों थाना क्षेत्र सहित जिले मे भी अवैध शराब बनाने और बिक्री करने का बड़ा नेटवर्क है और कार्रवाई के नाम पर औपचारिकता ही पूर्ण की जाती है । समय समय पर आबकारी विभाग ग्रामीण क्षेत्रों मे कार्रवाई कर अपनी सफलता का प्रचार करवा लेता है लेकिन देवास मे दीपक तले अंधेरा की चर्चा है जिसे कोतवाली पुलिस की कार्रवाई प्रमाणित कर रही है ।
जिला होमगार्ड कार्यालय के सामने से बड़ी मात्रा मे महुआ लहान और कच्ची खतरनाक शराब जप्ती सहित आदतन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद कोतवाली प्रभारी उमरावसिंह ने अपने सहयोगियों के साथ कालीबस्ती के नाम से कुख्यात क्षेत्र मे दबिस देकर जगदीश लुनिया,धर्मेन्द्र और निगरानी बदमाश बबलु लुनिया को हिरासत मे लिया । निरीक्षक उमरावसिंह ने घटना स्थान पर मीडिया को बड़ी सहजता से बताया कि कोतवाली क्षेत्र की कालीबस्ती मे वर्षो से अवैध शराब और अन्य कालै कारोबार चल रहे हैं । मन्दसौर के शराब कांड के बाद पुलिस अवैध शराब के कारोबारियों पर लगातार कार्रवाई कर रही है । निरीक्षक उमरावसिंह का बयान चर्चा का विषय बन गया है कि वर्षो से संचालित अवैध शराब के अड्डे पर अबतक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?।
कोतवाली क्षेत्र के ही कंजर मोहल्ला ,माताजी रोड पर बरसों से अवैध शराब बिक रही है ।शराबी पीकर रास्ते मे पड़े दिखाई देते हों लेकिन आबकारी और पुलिस दोनों ही इधर ध्यान नहीं देते ।
पूर्व मे यहां भी शराबकांड हो चुका है जिसमे शराबी पुलिस वाले सहित भोलम कंजर की आंखें प्रभावित हुई थीं और एक युवक की मोत हो गई थी । उस समय तत्कालीन कलेक्टर मिथनसिंह जी द्वारा आबकारी अधिकारी पांडे को बुलाया तो वह नशे मे धुत ही पहुंच गये और कलेक्टर द्वारा उन्हें तुरंत निलंंबित कर दिया गया था । इस समय कोतवाली,नाहर दरवाजा और औद्योगिक थाना अवैध शराब के प्रमुख केन्द्र बने हुए हैं । मन्दसौर की घटना और शासन के निर्देशानुसार ही सही पुलिस की सक्रियता अवैध शराब कारोबारियों के लिए अंकुश का काम कर रही है । यह सक्रियता बनी रहनी चाहिए ।

