भगवान नृसिंह की प्रतिमा ने पानी मे तैर कर दिया संदेश वर्षभर सुख-समृद्धी और खुशहाली रहेगी विशेष (हाटपिपल्या मे हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं के सामने होता है चमत्कार )

देवास (खुमानसिंह बैसशाकिर अली दीप) देवास जिले मे भगवान नृसिंह के नगर हाटपिपल्या मे 119 वर्ष से भमौरी नदी मे नृसिंह घाट पर डोल ग्यारस पर होता है चमत्कार । डोल ग्यारस पर भगवान नृसिंह की साडे सात किलो वजनी चमत्कारिक पाषाण प्रतिमा के दर्शन करने दूर-दूर से आए हजारों श्रद्धालुओं के सामने इस बार फिर लगातार तीन बार तैरने की वजह से यह आशा और विश्वास किया गया कि क्षेत्र मे इस वर्ष भी सुख-समृद्धी ,शांती और खुशहाली रहेगी ।
माना जाता है कि यह पाषाण प्रतिमा तीन बार पानी मे तैर जाती है तो पूरा वर्ष अच्छा निकलता है । दो वर्ष पूर्व प्रतिमा ने खराब वर्ष के संकेत दे दिए थे ) इसके चलते जनता का विश्वास और भी अटूट हो गया । इस बार मुहूर्त समय में मंदिर से निकल कर भगवान नृर्सिंह ने हाटपीपल्या नगर भ्रमण करते हुए शाम पांच बजे भमोरी नदी पर जलाभिषेक लिया ।यहां पर मंदिर के पुजारी राहुल वैष्णव द्वारा पूजा पाठ करके विधि विधान से मंत्रोचार के बाद परंपरानुसार प्रतिमा को हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति मे तैराया गया ।
अपार उत्साह के साथ डोल चल समारोह
चासिया रोड़ पर स्थित भमोरी नदी पर बने विशाल नृर्सिंह घाट पर हर्ष उल्लास के साथ शाम करीब साढ़े पांच बजे पहुंचा । यहां भगवान नृर्सिंह जी की ठोस पाषाण प्रतिमा को बहते जल में छोड़ा गया । लगातार तीन बार प्रक्रिया करने पर तीनों बार 10 से 12 सेकंड तक पाषाण प्रतिमा पानी में तैरती रही । इस आयोजन की तैयारी नृर्सिंह मंदिर समिति द्वारा पूर्व में ही कर ली गई थी।
कैसे मनता है पर्व
सर्वप्रथम अति प्राचीन नृर्सिंह मंदिर से गाजे, बाजे ,ढोल नगाड़ों एवं अखाड़ों के साथ पांच मंदिरों के डोल का चल समारोह निकाला गया जो कि नृर्सिंह घाट पहुंचा । रास्ते मे अनेक स्थानों पर पुष्पवर्षा से स्वागत् मे मुस्लिम समाज भी शामिल रहा । नृसिंह घाट पर बेहतर पुलिस-प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बीच विधि विधान के साथ सर्वप्रथम पंडित जी द्वारा स्नान कर नदी का पूजन एवं आरती की गई । तब भगवान नृर्सिंह की साढ़े सात किलो वजनी ठोस पाषाण प्रतिमा को नदी में तीन बार तेराया गया ।प्रतिमा ने तीनों बार तैर कर आने वाले वर्ष मे सुख-समृद्धी और खुशहाली के संकेत दिये तो घाट भगवान नृसिंह की जयजयकार से गूंज उठा । घाट पर व्यवस्था को लेकर तैयारियां पूर्ण थी। पुजारी राहुल पिता श्याम दास वैष्णव द्वारा इस बार मूर्ति को पानी में 3 बार तैराया गया । तीनों बार मूर्ति तेरती रही ।
भगवान नृर्सिंह ने एक बार फिर अपना चमत्कार दिखाया । बुधवार दोपहर तक नृर्सिंह घाट पर स्थित भमोरी नदी में पानी नहीं था । नगरवासियों को विश्वास था कि भगवान नृर्सिंह कहीं से भी पानी लेकर आएंगे और नदी में पानी में डोल ग्यारस पर मूर्ति तेराई जायेगी । सभी की आस्था और विश्वास पर भगवान नृर्सिंह ने मोहर लगाते हुए बुधवार शाम होते – होते हैं नदी में जमकर पानी आया और पानी नदी पर बने पुल के ऊपर से गुजरा जिसके चलते कई घंटों तक चासिया मार्ग बंद रहा ।
चमत्कार को लेकर है कई तरह की धारणा
भगवान नृर्सिंह की चमत्कारी पाषाण प्रतिमा को लेकर कई तरह की धारणा व विश्वास लोगों के मन में है। डोल ग्यारस के दिन मूर्ति को पानी में मंदिर के पुजारी द्वारा तीन बार नदी में छोड़ा जाता है । वह एक बार मूर्ति तैरने पर 4 महीने ,दो बार तैरने पर आठ महीने और तीनों बार अगर प्रतिमा पानी में तैर जाये तो पूरा साल अच्छा प्व्यतीत होता है। यह धारणा वर्षों से चली आ रही है जो सही भी साबित होती है।
आते वक्त महिलाएं करती है डोल की पूजा
डोल ग्यारस पर मूर्ति तैरने के बाद डोल वापस आते हैं जिनकी महिलाएं पूजा-अर्चना करती है।
इस अवसर पर वरिष्ठ प्रशासन-पुलिस अधिकारी और जनप्रतिनिधि सहित हजारों श्रद्धालु भी उपस्थित रहे ।