पुष्पगिरी पहुँचे मुनि प्रतीक सागर ने गणाचार्य पुष्पदंत सागर का पाद प्रक्षालन किया *


पुष्पगिरि तीर्थ में हुआ गुरु शिष्य मिलन, संघ के साधुओं ने गले मिल की प्रतीक सागर जी की अगुवानी
*इंदौर*। प्रसिद्व दिगम्बर जैन तीर्थ पुष्पगिरि में गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज ने अपने गुरु पुष्पदंत सागर जी से मिलन हुआ। ग्राम कुमारिया से ढोल ढमाकों के साथ पुष्पगिरि पहुँचे मुनि प्रतीक सागर जी की मुख्य द्वार पर आचार्य संघ के सभी साधुओं ने गले मिलकर भव्य अगुवानी की। इस दौरान मुनि श्री का आचार्य प्रसन्न ऋषि जी, आचार्य धर्मभूषण जी, आचार्य प्रणाम सागर जी, मुनि प्रज्ञा सागर जी, मुनि अरुण सागर जी, मुनि सौरभ सागर जी, मुनि प्रगल्भ सागर जी सहित संघ के साधुओं से मिलन हुआ। इसके बाद मुनि प्रतीक सागर जी ने अपने गुरु पुष्पदंत सागर जी का प्राद प्रक्षालन एवं पाद पूजा कर अर्घ्य समर्पित किया। गुरु मिलन के दौरान गुरु शिष्य के अद्भुत वात्सल्य को देखकर अभिभूत मुनि भक्तो के जयकारों से परिसर गुंजायमान रहा। पुष्पगिरी तीर्थ परिसर में उपस्थितो गुरु भक्तों को सम्बोधित करते हुए मुनि श्री सौरभ सागर जी ने कहा कि आज भक्तों की भावना से धर्म की एक नई प्रभावना हुई है तो वही भक्तो के भावमय नमस्कार ने एक चमत्कार को जन्म दिया है। मुनि प्रतीक सागर ने भी माचिस की डिबिया में तीलियों के समान घरों में बंद भक्तो में धर्म का प्रकाश प्रज्वलित किया है। मुनि प्रतीक सागर जी ने भी संबोधित करते हुए कहा कि यह सब गुरु महिमा का ही प्रभाव है गुरु कृपा से कंकर भी तीर्थंकर बन सकता है गुरु जिसका स्पर्श कर लेता है वह लोहा भी सोना बन जाता है।

। कार्यक्रम के दौरान दिलीप जैन, महावीर जैन सालरिया, जितेंद्र साँवला, मुकेश जैन ने भी मुनि श्री के सुसनेर नलखेड़ा प्रवास के अनुभवों को साझा किया। अशोक जैन मामा, ललित साँवला, आशीष त्यागी ने भजन प्रस्तुत कर कार्यक्रम की शुरुआत की। शाम को आचार्य भक्ति एवं महाआरती का आयोजन किया गया। सुसनेर नलखेडा के दिगम्बर जैन जागरण युवा संघ के सदस्यों ने मुनि श्री को श्रीफल भेंट कर चातुर्मास के लिए अनुरोध किया। इस अवसर पर संघ की सुसनेर नलखेडा शाखा के पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित रहे। संघ के प्रवक्ता दीपक जैन ने बताया कि मुनि प्रतीक सागर जी सुसनेर में 22 दिन व नलखेडा में 5 दिन के प्रवास के बाद 8 दिन मे 150 किलोमीटर की पदयात्रा कर अपने गुरु से मिलने पुष्पगिरि पहुँचे है। 
चित्र – गणाचार्य पुष्पदंत सागर जी का पाद पूजन करते हुए मुनि प्रतीक सागर जी।