सत्संग में वह शक्ति है, जो व्यक्ति के जीवन को बदल देती है – श्री 1008 पं. कुंवरकांत शास्त्री


देवास। चैत्र नवरात्रि के उपलक्ष्य में विश्रामबाग राधागंज स्थित हनुमान मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिवस श्री 1008 पं. कुंवरकांत शास्त्री ने कपिल चरित्र, सती अनुसुइया, ध्रुव चरित्र, जड़ भरत चरित्र, नृसिंह अवतार आदि प्रसंगों वर्णन किया। आयोजक गौरीशंकर पटेल, भारतसिंह खींची एवं लीलाधर देथलिया ने बताया कि कथा में बुधवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। महाराज श्री ने व्यासपीठ से आगे कहा कि मनुष्य जीवन में जाने अनजाने प्रतिदिन कई पाप होते है। उनका ईश्वर के समक्ष प्रायश्चित करना ही एकमात्र मुक्ति पाने का उपाय है। उन्होंने ईश्वर आराधना के साथ अच्छे कर्म करने का आह्वान किया। सत्संग में वह शक्ति है, जो व्यक्ति के जीवन को बदल देती है। व्यक्तियों को अपने जीवन में क्रोध, लोभ, मोह, हिंसा, संग्रह आदि का त्याग कर विवेक के साथ श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए। वैराग्य मानव को ज्ञानी बनाता है। वैराग्य में मानव संसार में रहते हुए भी सांसारिक मोह माया से दूूर रहता है। उन्होंने कहा कि मनुष्यों का क्या कर्तव्य है इसका बोध भागवत सुनकर ही होता है। विडंबना यह है कि मृत्यु निश्चित होने के बाद भी हम उसे स्वीकार नहीं करते हैं। निस्काम भाव से प्रभु का स्मरण करने वाले लोग अपना जन्म और मरण दोनों सुधार लेते हैं। प्रभु जब अवतार लेते हैं तो माया के साथ आते हैं। साधारण मनुष्य माया को शाश्वत मान लेता है और अपने शरीर को प्रधान मान लेता है। जबकि शरीर नश्वर है। व्यासपीठ की आरती मुख्य अतिथि धर्मेन्द्र सिंह बैस, गणेश पटेल, संतोष पंचोली के साथ आयोजन समिति के टेकचंद पटेल रतनखेड़ी, अजय सिंह खींची, बाबू सिंह बैस एवं अशोक श्रीवास्तव सहित भक्तजनों ने की। कथा में बीच-बीच में मण्डली द्वारा सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी गई, जिन पर महिलाओं ने जमकर नृत्य किया। कथा 10 अप्रैल तक प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक होगी।