शनिचरी अमावस्या पर धारा जी मे रही श्रद्धालुओं की भीड़ सुनील योगी


देवास/ बागली – शनिचरी अमावस्या पर धार्मिक मान्यता अनुसार पवित्र नदियों में स्नान करने से पितृदोष निराकरण होता है। वही इस पावन अवसर पर पवित्र नदी स्नान से पुण्य लाभ भी मिलता है। देवास जिले में नर्मदा के दो प्रमुख तट जिसमें नेमावर एवं धारा जी घाट प्रमुख है। हालांकि 2007 के बाद लगभग 15 वर्ष तक धारा जी घाट में स्नान प्रतिबंधीत रहा सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन द्वारा धारा 144 हर पावन पर्व पर लागू रहती। कई प्रशासनिक अधिकारी एवं पुलिस प्रशासन सुरक्षा के तरीके अपनाते हुए श्रद्धालुओं को स्नान करने से मना करते रहे। लेकिन 2022 में प्रशासन ने धारा जी घाट पर धारा 144 को शुन्य करते हुए वर्तमान में धारा जी घाट पर स्नान की अनुमति दे दी है। एन वी डी ए की मदद से इस स्थान पर घाट निर्माण चल रहा है। लेकिन धारा जी मे अब पहले जैसा नजारा अब नहीं रहा। जिन लोगों ने वह दृश्य देखा है, यहां पर नर्मदा बड़ी धार के रूप में गिर कर महज आगे 15 फीट चौड़ी गहरी खाई में परिवर्तित होकर 2 किलोमीटर तक प्रहावित होती थी । लेकिन महेश्वर विद्युत परियोजना के बन जाने से इस स्थान पर जहां 30 फीट ऊपर से धार गिरती थी । उस स्थान पर अब 118 मीटर जलजमाव हो चुका है। और अब यह बड़ी झील जैसी प्रतीत होती है। शनिचरी अमावस्या पर कई श्रद्धालु इस स्थान पर स्नान करने पहुंचे । श्रद्धालुओं को घाट समय सीमा में नहीं बनने का दुख है। वही सकारात्मक सोच यह भी है, कि घाट के शुरुआती निर्माण से दुर्घटना का खतरा टल गया है। आज भी कई श्रद्धालुओं ने निर्माणाधीन घाट पर सुरक्षा रूप में स्नान किया। पिपरी पुंजापुरा उदय नगर में पवित्र स्थान को लेकर उत्साह देखा गया। श्रद्धालु धर्मेंद्र गुरु ने बताया कि लंबे समय के बाद धारा जी घाट पर श्रद्धालुओं की चहल-पहल देखी गई।
छोटी नाव से ओम्कारेश्वर तक यात्रा होती थी उस वक्त
2007 के पूर्व छोटी नाव से कई श्रद्धालु धारा जी से ओकारेश्वर तक की यात्रा करते थे ओंकारेश्वर के कई नाविक विशेष पर्व पर अपनी नाव लेकर धारा जी स्नान घाट पर आ जाते थे यह नजारा बेहद खूबसूरत था। यह नजारा अब अतीत बन चुका है।