देवास- स्टेशन रोड स्थित नाथ समाज की वर्षों पुरानी समाधि स्थल भूमि संबंध में देवास एवं अन्य स्थानों के नाथ समाज के संत महंत एवं नागरिकों ने देवास कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर समाज के प्रतिष्ठित लोगों द्वारा देवा जिलाधीश के नाम समाधि स्थल नपती संबंध में आवेदन प्रस्तुत किया समाज के युवा पूर्व पार्षद सुनील योगी ने कहां की नाथ योगी समाज की मांग है। कि समाधि स्थल की जमीन तीन समाज के लोग उपयोग में ले रहे हैं। जिसमें मुस्लिम समाज, वाल्मिकी समाज व नाथ समाज प्रमुख है। उक्त समाधि स्थल शासकीय है। उसमें जमीन की नपती करके समाधि स्थल की पृथक से नाथ योगी समाज को दी जाए। ताकि भविष्य में टकराव की स्थिति निर्मित ना हो।
सर्वविदित है कि सर्वे नं. 84 स्टेशन रोड गीता भवन के पास है। जिसे नाथ योगी समाज समाधि स्थल के नाम से पहचानता है इसी समाधि स्थल भूमि के संदर्भ में समाज द्वारा पहले भी तात्कालिक कलेक्टर को 3 अप्रैल 2012 को ज्ञापन देकर निराकरण मांग पत्र दिया था इसके बाद 12 फरवरी 2015 व 29 नवंबर 2022 को समाज द्वारा समय-समय पर ज्ञापन दिया गया है। जिसकी छाया प्रति तात्कालिक कलेक्टर को उपलब्ध करा दी गई है। नाथ योगी समाज के पुराने लोगों के कथन अनुसार स्टेशन रोड गीता भवन के समीप से ही समाधि स्थल की भूमि उपलब्ध है। धीरे-धीरे उस पर मुस्लिम समाज के लोगों ने कब्जा कर लिया धार्मिक सद्भाव बना रहे इसलिए नाथ योगी समाज ने विरोध नहीं किया। समाज के लोगों ने बताया कि हमने पहले भी आवेदन दिया था । कि नाथ समाज परंपरा अनुसार मरणोपरांत मृतक को संत की उपाधि मानते हुए उसे संत की भांति भगवा वेश धारण कर पालकी में ले जाकर मंत्रोच्चार के साथ समाधि दी जाती है। वर्तमान समाधि स्थल सर्वे क्रमांक 84
सार्वजनिक होकर शासकीय अभिलेख में हिन्दू समाज के मरघट के रूप में दर्ज है। जिसे नाथ समाज के लोग समाधि स्थल के रूप में उपयोग में लेते हैं वर्तमान में यह स्थान नगर पालिक निगम अधीन है। लेकिन यहां पर मुस्लिम समाज के लोग प्रशासन को गुमराह करके अवैध निर्माण करते जा रहे है। साथ ही यह भी कहते है की प्रशासन के सहयोग से ही हम यह कार्य कर रहे है। पूर्व में नाथ समाज के लोगो ने प्रशासन, पुलिस, नगर-निगम कमिश्नर को भी शिकायत एवं निवेदन कर समस्या का शांतिपूर्वक समाधान निकालने को कहा था लेकिन किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं हुई। अत: निवेदन है कि इस विवाद को शंतिपूर्वक ढंग से सुलझाकर नपती करके हमारा कब्जा हमें दिया जाए।

