— शाकिर अली दीप भारतीय संस्कृति का भव्य और दिव्य सौन्दर्य बसंत मे साकार होता है… रितुराज के हाथों वन,उपवन,खेतों और उद्यान का अद्भुत श्रृंगार होता है… कलियों से लेकर नव कोपलों मे रस का संचार होता है… वातावरण मे सम्मोहन और प्यार होता है… कोयल के अमृत स्वर से आनंद का विस्तार होता है और यही रंग बसंती जीवन का आधार हैता है । कला और ज्ञान की देवी मां शारदा का जन्मोत्सव प्रकृति मनाती है और हमे सेवा की परिभाषा समझाती हैं । खेतों मे सरसों के पीले पुष्पों की मुस्कान और गेहूं की स्वर्णिम फसलों के वरदान हमे सुख-समृद्धी से भर देते हैं । बसंत सभी के लिए अपने ख़जाने खोल देता है … उत्साह के उपहार अनमोल देता है और खुश्बु की भाषा मे बोल देता है कि, खुशियां बांटने से अधिक आनंद कहीं भी नहीं मिलता है । बसंत प्रकृति से लेकर प्रवृति मे भी ताज़गी भर देता है… फूलों और फलों से मालामाल कर देता है । बसंत का संदेश अपनाकर ही हम जीवन को समृद्ध और सुन्दर बना सकते हैं । साधकों के लिए माता सरस्वती का जन्मोत्सव मयूर पंखी सिद्धियां अपार लेकर आता है… कलाकारों के लिए सफलताओं का उपहार लेकर आता है,कलमकारों के शब्दों मे अमृत का सार लेकर आता है और सम्पूर्ण मानवता के लिए खुशियों का संसार लेकर आता है । बसंत की मुस्कान आंखों से सीधी दिल मे उतर जाती है… तितली और भौंरों को लुभाती है,पक्षियों को बुलाती है और प्रेम की भावनाओं को जगाती है ।
इस वासंती बयार मे नवरात्र की दिव्य शक्ति धाराएं भी बह रही हैं और आशीषों के साथ कह रही हैं कि मानव मन मे बारहो मास बसंत का वास होना चाहिए … नई चेतना ,आशा और विश्वास होना चाहिए ।हम नदियो और पर्यावरण की सेवा ,स्वच्छता और सुरक्षा मे समर्पित होकर ही बसंत को आमंत्रित कर सकते हैं । हम भी बसंत का संदेश और शिक्षा को अपनाएं … खुशियां बांटकर खुश हो जाएं…प्रेम,सहयोग और सद्भावनाओं के पुष्पों की सुरभि से वातावरण को मेहकाएं… शहिदों की कल्पना का भारत बनाएं और मां शारदा की श्रेष्ठ संतान कहलाएं , तभी देह और देश मे बारहो मास बसंत रहेगा ।
बसंत पंचमी की अनंत अमृतमयी शुभकामनाएं ।

