बागली से सुनील योगी
आदिवासियों का दर्द जमीन से जुड़े प्रतिनिधि समझ पाते हैं
बागली – चुनाव की रंगत धीरे-धीरे जमने लगी है । भारतीय जनता पार्टी ने विकास यात्रा निकालकर मतदाताओं में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए एड़ी से चोटी का जोर लगा दिया। उसके पूर्व कांग्रेश द्वारा भारत जोड़ो आंदोलन को सक्रिय करते हुए मतदाताओं के नजदीक तक जाने का सफल प्रयास किया। अब स्थानीय स्तर पर सामाजिक गणित बनाते हुए भावी उम्मीदवार मतदाताओं तक पहुंच रहे हैं हाल ही में बागली विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 174 जो अनुसूचित जनजाति आरक्षित सीट है। यहां पर कोरकु समाज की जन जागृति रैली संपन्न हुई। उक्त यात्रा का देवास जिले आगमन पर वैसे तो दोनों पार्टी के प्रमुख कार्यकर्ताओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया कांग्रेस की ओर से बागली विधानसभा में अपनी उम्मीदवारी दर्शाने वाले गोपाल भोसले पूरी यात्रा में अग्रणी रूप से रहे और जहां-जहां यात्रा निकली वह अपनी उपस्थिति दर्ज कराने से नहीं चूके । हमारे संवाददाता को गोपाल भोंसले ने बताया कि वह जमीन से जुड़े कार्यकर्ता है इसलिए बागली विधानसभा जहां पर आदिवासी बहुल्यता है। वहां पर आदिवासियों का दर्द जमीन पर रहने वाला कार्यकर्ता ही समझ सकता है। वास्तविक विकास के लिए समाज के प्रत्येक गांव तक उचित सड़क सुरक्षा और शिक्षा बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाएं छोटे से छोटे स्थान पर होना जरूरी है और स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक की उसी गांव में रहने की अनिवार्यता भी जरूरी है। वर्तमान में अधिकतर ग्राम पंचायत पर आदिवासी जनप्रतिनिधि निर्वाचित जरूर है लेकिन उक्त ग्राम पंचायत पंचायत के सचिव और रोजगार सहायक बड़े शहरों से आना-जाना करते हैं। इससे स्थानीय नागरिकों को बहुत परेशानी आती है और समय पर शासन की योजनाओं का समुचित लाभ नहीं मिल पाता अभी भी कई आदिवासी किसान ऐसे हैं जिन्हें किसान सम्मान निधि और वृद्धावस्था पेंशन महीनों तक नहीं मिल पाती। यह व्यवस्था जमीनी कार्यकर्ता जनप्रतिनिधि के रूप में पूरी कर सकते हैं इसलिए उन्हें कांग्रेस पार्टी टिकट देती है तो वह जीत कर इन समस्याओं का निराकरण करेंगे।

