जो कुछ अपने पास है उसे मिल बांट कर उपयोग करें और परमात्मा का स्मरण करेंजयहिन्द सखी मंडल ने मनाई गुरू नानक देव जी की जयंती
देवास। जयहिन्द सखी मंडल ने महर्षि पतंजली योग परिसर में गुरू नानक देव जी की जयंती मनाई। इस अवसर पर गुरूद्वारे से सम्बद्ध इश्मित मल्होत्रा ने गुरूनानक देवजी के बचपन के बारे में बताते हुए कहा कि माता तृप्ती देवी और पिता कालूजी मेहता के घर जन्में नानक जी में प्रारंभ से ही अद्भुत गुण थे। वे अन्य बच्चों से अलग प्रवृत्ति केे थे। शांत, गंभीर और कोमल स्वभाव केे नानक देव जी दयालुता के साक्षात प्रतिमान थे। पिता द्वारा किसी अन्य कार्य के लिए दिए गए धन से उन्होंने भूखे समूह को भोजन करवा दिया था। जब उन्हें खेतों की रखवाली के लिए भेजा गया तो पक्षियों को उड़ाने के बजाय वे उन्हें दाने खाने के लिए आमंत्रित करने लगे। एकांतप्रिय नानक देव जी को सांसारिकता में बांधने के लिए उनका विवाह करा दिया गया। लेकिन विधि के विधान को कौन टाल सकता था। एक दिन अपना परिवार छोड़ कुछ समान विचारधारा वाले साथियों के साथ नानकदेव जी तीर्थ यात्रा पर निकल गए। नानक देव जी द्वारा की गई तीर्थ यात्राएं एक प्रकार से मोक्ष यात्राएं थीं। तीर्थ यात्राओं के दौरान उनके अंदर प्रेम, दयालुता, स्नेह, ईमानदारी, श्रद्धा और भक्ति केे गुण सागर की तरह विशाल रूप धारण कर चुके थे। अब वे नानक देव जी से गुरू नानक देवजी बन चुके थे। यह उनके सत्य, प्रेम और करूणा का ही प्रभाव था कि एक गांव में उन्होंन लालची और बेईमान जमीदार के भोजन में से रक्त निकाल कर दिखाया और एक गरीब पर मेहनती और ईमानदार व्यक्ति के भोजन में से दूध निकाल कर दिखाया। एक गांव में दुर्व्यवहार करने वालों को एक ही जगह आबाद रहने का आशीर्वाद दिया जिससे कि बुराई फैले नहीं। तो दूसरे गांव में अच्छा व्यवहार करने वालों को बिखर जाने का आशीर्वाद दिया जिससे अच्छाई सब और फैल जावे। काबा में जिधर उनके पांव उधर ही काबा के दर्शन करवाकर उन्होंने सिद्ध किया कि ईश्वर बाहर नहीं हमारे अंदर ही है। इश्मित मल्होत्रा ने गुरू नानक देव जी की तीन प्रमुख शिक्षाओं किरत करो, वंड छको और नाम जपो के बारे में विस्तार से समझाया। हमें सदैव अपनी कमाई पर निर्भर रहना है। जो कुछ अपने पास है उसे मिल बांट कर उपयोग करें और परमात्मा का स्मरण करें। इस प्रकार गुरू नानक देव जी ने तत्कालीन एकता और सामाजिक ताने बाने को बिखरने से बचाया। इस अवसर पर एक अन्य वक्ता स्मिता राहुल सलूजा ने जीवन को सार्थक बनाने के लिए सत्य, प्रेम, करूणा, ईमानदारी ओर दयालुता के गुणों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। आपने उपस्थित छात्राओं से आग्रह किया कि वे मोबाईल प्रियता को त्याग कर ज्ञानप्रियता को अपनाएं तो आपके और परिवार के सपने अवश्य ही साकार होंगे। जयंती कार्यक्रम में साक्षी चौधरी, अंकिता परसाई, अंजली शाक्य, जैनब खान, शिवानी वागेेला, मानसी ठाकुर, तनु चुलीवाल, नैना गुजराती, विद्या खेलवाल, यामिनी मोदी, शबाना शाह, अनुष्का साहा, लक्ष्मी बाली, अंजली ठाकुर सहित बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित थीं। अतिथि स्वागत रिया चौहान और जैनब खान ने किया। उद्देश्य विवरण स्नेहा ठाकुर ने दिया। भूमिका तनुश्री विश्वकर्मा ने प्रस्तुत की। संचालन अंबिका परमार ने किया। आभार जान्हवी ठाकुर ने माना।

