भरी बारीश के बीच ग्यारस पर दोगुने उत्साह के साथ निकला माँ दुर्गा का ऐतिहासिक विसर्जन चल समारोह

  • दोपहर दो बजे से एकाएक पहुंचने लगी झांकियां, बारीश में झूमते हुए निकली भक्तों की टोलियां
  • देवास की परम्परा बरकरार थी, बरकरार है, बरकरार रहेगी के पोस्टर हाथों में शामिल हुए कई समिति के सदस्य
    देवास। माँ शारदीय नवरात्रि महापर्व पर हर वर्ष ग्यारस पर निकलने वाला माँ दुर्गा का ऐतिहासिक विसर्जन चल समारोह हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी भरी बारीश में दोगुने उत्साह के साथ निकला। जिस प्रकार भक्तों ने माँ दुर्गा की नौ दिनो तक उपासना की। उसी प्रकार चल समारोह को ऐतिहासिक बनाकर माता की आकर्षक प्रतिमाओ को जुलूस में सम्मिलित किया। रात्रि से ही समितियो द्वारा जुलूस मार्ग पर मंच बनने एवं सजने तैयार हो गए थे। रविवार को दोपहर 12 बजे तक शहर का मुख्य मार्ग एमजी रोड़ स्वागत मंचो से सज गया।
                  दोपहर 2 बजे पश्चात चल समारोह के मुख्य मार्ग एमजी रोड पर प्रवेश करने के लिये जैसे ही माँ दुर्गा की पहली झांकी सयाजी द्वार पर पंहुची। वैसे ही एक के पीछे एक माता की आकर्षक प्रतिमाएं पहुंचने लगी। जिन्हें निहारने के लिए शहर सहित आसपास के क्षेत्रों के हजारों श्रद्धालु शहर पहुंचे और माता जगदम्बे को अंतिम विदाई दी। चल समारोह का शुभारंभ श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर से माँ तुलजा भवानी की आरती के साथ हुआ। दरअसल रविवार को शहर में माता जगदम्बे का विशाल चल समारोह निकला, जिससे पूरा शहर भक्तिमय हो गया। चल समारोह के दौरान बारीश भी हुई, लेकिन बारीश में भी भक्तों का जोशी कम नही हुआ। मंत्रमुग्ध होकर भीगते हुए भक्तजन व युवा चल समारोह में चल रहे थे। ऐतिहासिक चल समारोह देर रात्रि तक चलता रहा। जिसमें एक से बढकऱ एक माता की प्रतिमाए भक्तों के मन को आकर्षित करने वाली थी। जिसे देखने के लिए शहर सहित आसपास के क्षेत्रों के हजारों लोग जुटे। शहर में निकलने वाले माँ दुर्गा के ऐतिहासिक चल समारोह को लेकर लोगों में सुबह से उत्साह नजर आ रहा था। चल समारोह के दौरान डीजे की धून पर जहां कई युवा थिरक रहे थे तो कहीं अखाड़ो में कलाकार एक से बढ़ कर एक हैरतअंगेज कारनामें दिखा रहे थे। समारोह में संस्था युवा देवास दर्शन द्वारा रक्तदान महादान के साथ बलात्कारियों को फांसी की दो की आकर्षक झांकी बनाई गई, जो पूरे जुलूस में आकर्षण का केन्द्र रही। कई झांकियों में संस्था के सदस्य हाथों में बढ़ते लव जिहाद को रोकने के उपदेश के पोस्टर लिए शामिल हुए। इस दौरान कई मंचों से प्रसाद का वितरण किया। चल समारोह शहर के प्रमुख चौराहों सयाजी द्वार से शुरु होकर खेड़ापति मंदिर, तहसील चौराहा, नावेल्टी चौराहा, अलंकार मार्केट, पीठा रोड, तीन बत्ती चौराहा, जवाहर चौक, नयापुरा, जनता बैंक चौराहा और यहां से पुन: नावेल्टी चौराहा व फिर एकता क्लब चौराहे से मीरा बावड़ी होते हुए एबी रोड पर समाप्त हुई। उसके बाद माता प्रतिमाओं को आयोजकों द्वारा विसर्जन के लिए ले जाया गया।
    कई मंचों से हुआ स्वागत
    ऐतिहासिक चल समारोह के दौरान शहर में विभिन्न संगठनों ने जगह-जगह स्वागत मंच लगा रखे थे। जिनसे महाप्रसादी के रूप में कई प्रकार की खाद्य सामग्री वितरित की गई। विभिन्न सार्वजनिक पंडालों के आयोजकों का सॉफा बांधकर व भगवा गमछा ओढ़ाकर सम्मान भी किया गया। इस वर्ष निकले चल समारोह में लगभग 100 से अधिक माता की प्रतिमाएं शामिल हुई।
    मातृशक्ति भी उत्साह से हुई शामिल
    चल समारोह में इस उम्मीद से एम.जी. रोड पर दोनो और दर्शनार्थी, माताएॅ-बहिने एवं पुरुष वर्ग आकर बैठ गया था। चल समारोह में भगवा टोपी एवं परिधान धारण किये मातृशक्ति भी गरबा, डांडिया करते हुए उत्साह से शामिल हुई। खास बात यह रही कि चल समारोह का कहीं कोई नेतृत्व नहीं, समाज एवं दुर्गा उत्सव समितिया स्वयं ही नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरकर सामने आयी। चल समारोह में समाज की उत्सवप्रियता एवं परम्परा के साथ प्रेसजगत की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।