हाटपिपल्या सीट पर गहन आकलन का संकेत कांग्रेस की जीत तय- जैनेन्द्रसिंह पवार

देवास। मतदाताओं में सामान्य रूप से यह अवधारणा होती है कि यदि कोई विधायक मर जाए तो उपचुनाव होते हैं लेकिन मध्यप्रदेश में जो 28 उपचुनाव हो रहे है यहां विधायक नही उनका जमीर मर गया जो जनतंत्र के इतिहास में संविधान को घायल करने वाली घटना है।
आमजन मन मस्तिष्क बना चुका है कि उनकी सहमति किस सरकार पर थी और सरकार कौन प्रपंच रचकर चला रहा है। वैसे भाजपा, सरकार में बने रहने के लिए साम, दाम, दण्ड, भेद का रास्ता अपना रही है। तो वही कांग्रेस ने सरकार वापसी के लिए अपनी पूरी ताकत को झोंक दी है। जनजन से मिल रहे आशीर्वाद व जनसमर्थन जहां कांग्रेस के लिए आशा की किरण है तो भाजपा के लिए सत्ता, धन, बल, खरीद फरोख्त सत्ता में कायमी के आधार बने हुए हैं।
खरीद फरोख्त, दल-बदल अपेक्षा, उपेक्षा, लाभ हानि वाली सियासत की चपैट में देवास जिले की हाटपीपल्या विधानसभा सीट भी आई। हाटपीपल्या विधानसभा में कांग्रेस से पूर्व में रहे विधायक जो दल और दिल बदलकर भाजपा में शामिल हुए उन्होंने अपने आका सिंधिया की उपेक्षा का कारण बताते हुए भाजपा की शरण ली और भाजपा के कद्दावर नेता राजनीतिक संत स्व. कैलाश जोशी के सुपुत्र पूर्व मंत्री दीपक जोशी की विधानसभा हड़प ली। उपचुनाव में भाजपा के वही प्रत्याशी हैं। दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी ने विधायक रहे जनाधार वाले वरिष्ठ नेता ठा. राजेन्द्रसिंह बघेल के सुपुत्र सोनकच्छ नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष ठा. राजवीरसिंह बघेल को अपना प्रत्याशी बनाया है जो भाजपा के लिए पर्वत साबित हो रहे हैं ।
चुनाव प्रचार में दोनो ही पाटियों ने अपने प्रदेश के शीर्ष नेताओं को झोंककर विधानसभा के मतदाताओं को अपनी ओर लुभाने का प्रयास किया है। वैसे सूत्रों की माने तो भाजपा के बड़े नेताओं सभाओं में घटती भीड़ ने भाजपा की नींद उड़ा रखी है तो वहीं हाटपीपल्या के पूर्व, भूतपूर्व व भावी प्रत्याशियों की भूमिका को लेकर संगठन स्तब्ध है। जो ऊपर से नजर आ रहा है। वास्तविकता से परे है ।भाजपा की ओर से शिवराजसिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया , केन्द्रीय मंत्री और संगठन के कई महत्वपूर्ण पदाधिकारियों ने हाटपिपल्या में अपनी शक्ति और सक्रियता दिखायी ।
कांग्रेस पार्टी की ओर से नामवर नेता, संगठन के बड़े पदाधिकारी विधायक प्रत्याशी राजवीरसिंह के पक्ष में अपना योगदान दे रहे हैं। कमलनाथ की सभी सभाओं में एकत्रित भीड़ ने संकेत दे दिए है कि जनता ने बिकाऊ और टिकाऊ से चुनने का अपना मन बना लिया है। सभाओं की श्रृंखला में कमलनाथ, आचार्य प्रमोद, जीतु पटवारी, पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा, युकां अध्यक्ष कुणाल चौधरी की सभाओं ने मतदाताओं के मन मस्तिष्क पर प्रभावशील छाप छोड़ी है। कांग्रेस के वरिष्ठतम नेता और हाटपीपल्या विधानसभा से कमोवेश 7-8 बार चुनाव लड़े, कई बार विधायक रहे ठा. राजेन्द्रसिंह बघेल का 35-40 साल से विधानसभा क्षेत्र में त्याग, तप, कार्य, उनके पुत्र कांग्रेस प्रत्याशी राजवीरसिंह बघेल के लिए जीवनदायिनी सौगात बनी हुई है तो दूसरी ओर भाजपा के प्रत्याशी के पिताश्री का कांग्रेस से बगावत कर कांग्रेस प्रत्याशी को हराने की राह बताना और पुत्र की दल बदल की घटना ने भाजपा प्रत्याशी को पुस्तैनी दल बदल और गद्दारी की विरासत घोषित कर रखा है। जो मतदाताओं पर विपरीत प्रभाव डाल रही है।
पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा ने जो आलाकमान द्वारा चुनाव प्रभारी घोषित है और शहर कांग्रेस अध्यक्ष मनोज राजानी ने पूरी टीम को लेकर चुनावी समर में मैदान पकड़ रखा है। हालांकि छोटी-मोटी घटनाओं को कभी-कभी मीडिया बड़ी सुंदरता से परोसता रहता है लेकिन ऐसा कुछ नही है। ठा. राजेन्द्रसिंह बघेल का विधानसभा के प्रति कार्य, समर्पण, त्याग, तर्जुबा और मतदाताओं का बघेल साहब के प्रति स्नेह एवं सज्जन वर्मा का राजनैतिक लंबा तर्जुबा, मैदानी कार्य क्षमताएं और मेहनत नि:संदेह तरूणाई के प्रतीक राजवीरसिंह बघेल को कामीयाबी की ओर निश्चित रूप से अग्रसर कर रखा है। मतदाता बहुत जागरूक है। टिकाऊ और बिकाऊ से चयन कर चुका है। मतदाता अपना निर्णय ईव्हीएम में 3 नवंबर को कैद कर देगा। जिसकी गणना 10 तारीख को होगी। जो हमारे कयासों और अनुमानों को प्रमाणित करेगी। विडम्बना है टिकाऊ-बिकाऊ, दल बदल की सियासत ने जमीनी मुद्दे, बड़ती महंगाई, बड़ती पेट्रोल की कीमतें, कोरोना काल में चिकित्सा का अभाव, प्रदेश में हो रही बलात्कार की घटनाए, सडक़, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे मुल मुद्दों से जनता को भटका दिया है। हाटपिपल्या के मतदाता वर्षों बाद भाजपा से मुक्त हुए थे लेकिन वही प्रत्याशी बिकाऊ और मतदाताओं से विश्वासघात करने वाला बनकर भाजपा के नाम पर वोट मांगने से मतदाता नाराज हैं और भाजपा के शक्तिशाली चेहरे दलबदलु पर मेहरबान होने से भी मतदाता और ठगाए भाजपाई अन्दर ही अन्दर आक्रोशित हैं ।