
देवास(खुमानसिंह बैस/शाकिर अली दीप) अव्यवस्थाओं और कमिशनखोरी के लिये कुख्यात महात्मा गांधी जिला चिकित्सालय के प्रसूति वार्ड की हालत बदहाल है…यहां अयोग्य और अवैध वसूली करने वालों का मजबूत जाल है… गरीबों की नहीं गलती दाल है और असहनीय अव्यवस्थाऐं सवाल है? प्रसूति वार्ड मे कुत्ते और कुतियांओं का आतंक है । यह जानवर जिला चिकित्सालय मे निडर होकर घूमते हैं और भर्ती मरीज,घायल,प्रसूताओं सहित उनके परिजनो के खाद्य पदार्थों पर मुंह मारते हैं । महात्मा गांधी जिला अस्पताल के प्रसूति वार्ड को लूट का केन्द्र बनाने मे डॉक्टर शोभा राणा, सहित अन्य नाम भी हैं ।शोभा राणा सिर्फ अपने फायदे वाले फोन ही रिसीव करती हैं । यह वर्षो से जिला अस्पताल की अव्यवस्थाओं मे चर्चित हैं । डॉक्टर पवनीकर अपने निम्न स्तरीय व्यवहार के लिये चर्चित है ।घर को नर्सिंग होम और क्लिनिक बनाने मे डॉक्टर बनकर गर्भवती महिलाओं को गुमराह कर अवैध कमाई के कारोबार का कीर्तिमान बनाने वाली मधु बोर्डे का नाम भी शामिल है । अपनी दलाल महिलाओं के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को जाल मे फंसाकर उन्हें जिला अस्पताल लाना और सेटिंग वाले नर्सिंग होम पहुंचाना इनकी पुरानी आदत बताई जाती है । प्रसूति वार्ड मे हजारों रुपये रिश्वत लेकर अयोग्य नियुक्ति भी आसानी से की जाती है जो अपनी रिश्वत कवर करने के लिए प्रसूताओं और परिजनों से वसूली करते हैं या उनसे खुलकर बदतमीजी करती हैं । सिविल सर्जन का चिकित्सालय पर नियंत्रण ही नहीं है और मुख्य स्वास्थ्य चिकित्सा अधिकारी एम पी शर्मा सब कुछ जानकर भी अनजान हैं । 6 दिसंबर को सुबह प्रसूति वार्ड मे एक नर्स इन्जेक्शन लगाते समय डॉक्टर से भी अधिक अकड़ दिखा रही थी और मानसिक संतुलन बिगड़ने जैसा व्यवहार कर रही थी । कुछ प्रसूताओं की साथी महिलाओं ने आपत्ति ली तो वह आपे से बाहर हो गई । पता चला की वह बहु उद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता है और नियमानुसार फील्ड वर्कर है । प्रसूति वार्ड मे हजारों रुपये की रिश्वत के बल पर नियुक्ति करवाने वाली अंजु नामक यह स्वास्थ्य कार्यकर्ता(एएनएम) प्रसूताओं के जीवन से खिलवाड़ कर रही है और अभद्र व्यवहार भी । प्रसूति वार्ड की इंचार्ज सुधा नायर स्कूल संचालक की पत्नि हैं और मोबाइल उनके पति के पास रहता है जो आठ दस घंटे बाद रिटर्न लगाते हैं या उनके माध्यम से मैडम तक मैसेज जाता है । कलेक्टर चन्द्रमौली शुक्ला और एसडीएम जिला चिकित्सालय को लेकर सक्रियता तो दिखाते हैं लेकिन अव्यवस्थाओं को व्यवस्थाओं मे नहीं बदल पाते हैं । यहां यह लिखा जा सकता है कि सबकुछ भगवान भरोसे चल रहा है ।देवास की महिला विधायक और राजमाता गायत्रीराजे पवार को जिला चिकित्सालय मे अव्यवस्थाओं , रिश्तखोरी और अभद्रता की शिकार प्रसूताओं और उनके परिजन की याद नहीं आती ? वह किसी कार्यकर्ता के लिये रात मे अपनी टीम को लेकर थाने जा सकती हैं ,नगरनिगम की सीढ़ियों पर बैठ सकती हैं लेकिन चिकित्सालय मे अनेक अव्यवस्थाओं का शिकार प्रसूताओं को देखने नहीं जातीं ? आखिर जिला अस्पताल की अव्यवस्थाओं के आगे से “अ” कोन हटाएगा?

