
देवास ( खुमान सिंह बैस) लॉकडाउन मे चलती-फिरती अदालत बनकर आमआदमी और छोटे दुकानदारों पर डण्डे बरसाती ,वर्दी,पद,अधिकारों के दुरुपयोग का कीर्तिमान बनाती, देवास मे ड्रोन से निगरानी और सक्रियता की नौटंकी का प्रचार करने वाली पुलिस न तो निरंतर संचालित बड़े जुआ अड्डों को देख पाती है? न ही अवैध कारोबारियों को ।
मुखबिरों की सूचना पर मजबूरी मे सट्टा ,जुआ अड्डों पर छापा मारने मे सरगनाओं को छोड़कर नौकरो पर कार्रवाई को अपनी सफलता बताकर प्रचारित करते हैं । नकली दूध के दो बड़े कारोबारियों को भी मुखबिरों ने लाखों के सामान सहित गिरफ्तार कराया लेकिन पूरा सच सामने नहीं आया ।
देवास मे नकली 30 नम्बर बीड़ी बनाने का कारोबार कई वर्षो से जारी होकर उसके साथ अन्य लोकप्रिय ब्रांड की नकली पैकिंग बहुत आसानी से की जा रही है ।
कोतवाली थाना क्षेत्र के कर्मचारी कॉलोनी मे आशिक नामक व्यक्ति के से किराये पर मकान लेकर नकली 30 नम्बर और इन्दौर की आजाद 51 बीड़ी बनाते रंगें हाथों गिरफ्तार तीन फकीर परिवार के भाईयों लाला शाह,अकरम शाह और असलम शाह का अवैध कारोबार देवास जिले सहित बाहर भी फैला है । इनके खुद के पास अपनी बीड़ी बनाने का लायसेंस है और उसी की आड़ मे यह बड़े और चर्चित ब्रांड की बीड़ी बनाकर अवैध कमाई करते हैं । सट्टा जुआ और अनैक अय्याशी के शौकीन फकीर बंधुओं के अवैध कारोबार की जानकारी कोतवाली के कुछ चर्चित पुलिसकर्मियों को भी है । तीन बत्ती क्षेत्र मे दरगाह के पास रहने वाले इस परिवार की बीड़ी की दुकान मदनी दरबार होटल के पास वर्षों रही है । इस दुकान पर हमीद शाह उर्फ हम्मू सेठ और उनके बड़े बेटे मकसूद शाह बैठते थे ।मकसूद शाह आजकल हजलकार (कवि)बनकर मुशायरे और कविसम्मेलनों मे भी दिखाई देते हैं ।
लॉकडाउन मे किराए का मकान कर्मचारी कॉलोनी मे लेकर बना रहे थे नकली बीड़ी । पुलिस ने तीनों भाइयों को गिरफ्तार कर किया एक लाख से ज्यादा का माल जप्त । जप्त बीड़ी,नकली रैपर और कच्चे माल को लोडिंग वाहन मे ले जाने से पहले टी आय उमरावसिंह ने मीडिया को बताया कि यह पांच सात दिन से बीड़ी बना रहे थे और लॉकडाउन खुलने पर बैचने की योजना थी । वास्तव मे इनका अवैध कारोबार आसानी से संचालित होता है । बस स्टेण्ड से ही जिले मे सप्लाई की जाती है , बहुत आसानी से असली रैपर भी छपते हैं और नकली बीड़ी आसानी से पैकिंग भी की जाती है ।
अब देखना यह है कि पुलिस के हाथ असली रैपर छापने वाले सहित नकली बीड़ी खपाने वाले जिले के कितने दुकानदारों तक पहुंचते है ?।

