मध्य प्रदेश के देवास में आज आस्था और सौहार्द का एक अनोखा नजारा देखने को मिला। वारसी नगर स्थित मशहूर हजरत कबिट शाह वाली बाबा की दरगाह पर 26वां उर्स बड़े ही अकीदत और धूमधाम के साथ मनाया गया। जहाँ धर्म की दीवारें टूटती नजर आईं और हिंदू-मुस्लिम एकता की एक बेमिसाल तस्वीर पेश की गई।
देवास के वारसी नगर में गूँजती कव्वालियों की आवाज और फिजा में घुली लोबान की खुशबू… मौका था कबिट शाह वाली बाबा के 26वें उर्स का। हर साल की तरह इस बार भी यहाँ जायरीनों का सैलाब उमड़ पड़ा। इस आयोजन की सबसे खास बात रही यहाँ दिखने वाली ‘कौमी एकता’। क्या हिंदू, क्या मुस्लिम—हर कोई बाबा के दरबार में सिर झुकाने और मन्नतें मांगने पहुँचा था।
K.P. मित्र मंडल के नेतृत्व में यह पूरा आयोजन गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। मंडल की देखरेख में उर्स की तमाम रस्में पूरी की गईं, जो यह संदेश देती हैं कि आस्था का कोई एक धर्म नहीं होता।
उर्स के मौके पर दरगाह शरीफ पर 10 से ज्यादा चादरें पेश की गईं। अकीदतमंदों ने बाबा की चौखट पर माथा टेका और देश-प्रदेश की खुशहाली के लिए दुआएं मांगी। इस दौरान केवल देवास ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए जायरीनों ने भी शिरकत की।
शाम ढलते ही महफिल-ए-समां सज गई। मशहूर फनकार आफताब कादरी ने जब अपनी आवाज का जादू बिखेरा, तो लोग झूमने पर मजबूर हो गए। कादरी की कव्वालियों ने समां बांध दिया और बाबा के दरबार में रूहानी माहौल बना दिया।
आस्था और भाईचारे का यह संगम सिखाता है कि हम सब एक हैं। देवास का यह उर्स आज एक बार फिर अपनी इन्हीं यादों के साथ संपन्न हुआ।

