देवास जिला चिकित्सालय का रुप बदल रहा है लापरवाही और कमिशनखोरी नहीं बदल रही (अव्यवस्था निगल गई मां के पहले नवजात को)

देवास (खुमानसिंह बैस) अव्यवस्थाओं , अवैध वसूली ,दलाली और कमिशनखोरी के लिये कुख्यात महात्मा गांधी जिला चिकित्सालय मे सुविधाओं के नाम पर हर बार करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद भी समस्या जस की तस है ।
घायल और मरीजों सहित गर्भवतियों और उनके परिजनों से अवैध वसूली जारी है । यहां के अयोग्य और आलसी अकसर घायल,मरीज ,गर्भवतियों और बच्चों को इन्दौर रेफर कर देते हैं जो इतने बड़े जिला अस्पताल पर सवालिया निशान है? । सबसे आधिक अवैध वसूली प्रसूति वार्ड मे होती है और यह सिलसिला अस्थायी रुप से बीमा अस्पताल मे स्थानान्तरित होने पर भी जारी है । यहां डॉक्टर से लेकर सफाई कर्मचारी भी बिना अवेध वसूली के काम नहीं करते हैं । शासकीय सुविधाएं और वेतन पाकर भी अवैध वसूली करने वालों की भूख नहीं मिट रही है । वरिष्ठ अधिकारियों , विधायक ,सांसंद और प्रशासनिक अमले के निरंतर अवलोकन के बावजूद निरंकुश वसूली जारी है ।
एक गर्भवती महिला को पहली डिलेवरी के लिये भर्ती किया गया जिसके पेट मे बच्चा हेल्दी था । उसे गहरी पीड़ा के बावजूद ऐसे ही पटक रखा और बाद मे घर जाने को कह दिया । किराये के मकान मे रहने वाली महिला का पति अफजल उसे मजबूरी मे संस्कार हास्पिटल ले गया जहां रुपया ही संस्कार होता है । ऑपरेशन से यहां तीन किलो का शिशु होता है लेकिन कहा जाता है कि विलंब से लाने पर बच्चे के पेट मे गन्दा पानी चला गया है और उसे गहन चिकित्सा की जरुरत है । ऑपरेशन मे उधार लेकर पच्चीस हजार खर्च करने वाले गरीब बाप के पास अब बच्चे के इलाज की जिम्मेदारी आ गई ।
बच्चों के बेहतरीन आयसीयू के लिये चर्चित जिला चिकित्सालय मे नवजात को भर्ती करने से इन्कार कर दिया और मां बाप की पहली उम्मीद बच्चे की मौत हो गई ।
जिला अस्पताल के ही ताजा मामले मे एक महिला को तीसरी डिलेवरी मे डॉक्टर शोभा राणा ने ऑपरेशन करने से मना कर दिया वहीं दूसरे दिन डॉक्टर साधना वर्मा ने पांच हजार रुपये लेकर ऑपरेशन कर दिया । प्रसूति वार्ड मे अवैध वसूली और रुपये लेकर ऑपरेशन सहित ड्रेसिंग ,इन्जेक्शन लगाने पर भी अवैध वसूली पर कोई अंकुश नहीं है । जन्म प्रमाण-पत्र भी रुपये लेकर ही बनाये जा रहे हैं । छुट्टी देने के भी रुपये लिए जाते हैं ।
इस समय जिला चिकित्सालय कायाकल्प के नाम पर बढ़े बजट का कार्य चल रहा है और अनेक सुविधाएं देने के दावे और वादे किये जा रहे हैं । ऐसे ही दावे ट्रामा सेन्टर निर्माण से पहले किये जा रहे थे लेकिन नतीजा शून्य ही रहा है । जिला चिकित्सालय की सूरत बदल रही है अच्छी बात है लेकिन अव्यवस्थाओं और अवैध वसूली पर अंकुश नही लगाया गया तो चमकता चेहरा किसी काम का नहीं है । प्रशासनिक अधिकारियों ,सीएमएचओ ,सिविल सर्जन और जनप्रतिनिधियों को इस तरफ गंभीरता से ध्यान देना चाहिए ।