सटोरियों पर पुलिस की कार्रवाई बनी सवाल ? पत्तीबाजार से मुख्य संचालक हुए पत्ता !

देवास(खुमानसिंह बैस) पुलीस अधीक्षक के निर्देशानुसार पुलिस द्वारा अवैध कारोबारियों के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई मजबूरी है या औपचारिकता यह समझ मे नहीं आ रहा है ? ।
देवास सहित जिले मे भी अवैध कारोबारियों के विरुद्ध अभियान मे जो दिखायी और सुनाई दे रहा है वह आश्चर्यजनक है ।
देवास के बीच पत्तीबाजार मे वर्षो से सट्टा व्यपार जारी है । वर्षो पहले खारी बावड़ी मे पत्तीबाजार के मुख्य सट्टा संचालक के निवास पर तत्कालीन कोतवाली ए एस आय बृजेश श्रीवास्तव ,प्रधान आरक्षक जगदीश पटेल और आरक्षक नरेन्द्र परिहार पर सटोरियों के हमले मे तीनों के गंभीर घायल होने के बाद एस पी एम आर कृष्णा,एएसपी विश्वनाथ बर्वे ने हमलावर सटोरियों का साम्राज्य समाप्त कर दिया था ।
इस घटना के बाद पुलिस विभाग के हमले मे हाथ टूटे प्रधान आरक्षक और अन्यों के सहयोग से सट्टा लिखने वाले एक कर्मचारी इस्माईल को पत्तीबाजार का प्रधान(मुखिया) बना दिया गया जो कुली से करोड़पति बनकर पुलिस का बड़ा सहयोगी रहा । समय के साथ यह जिलाबदर होकर फिर से रोडपति हो गया ।
वर्तमान मे इसी परेशान सटोरिये का ठिया किराये पर लेकर अनेक सटोरियों द्वारा अपनी किस्मत आजमाई जा रही है ।
इस बार लॉकडाउन खुलते ही शहर के तीन कुख्यात सटोरियों ने पार्टनरी मे यहां सट्टा कारोबार शुरु किया है ।
बताया जाता है कि पन्द्रह हजार रुपये महिना ठिये का किराया और ठिये वाले को काम देकर डेढ़ लाख खाकी का डिसाइड किया गया था ।
एस पी डाक्टर शिवदयालसिंह द्वारा अवैध पर अंकुश के प्रकाशन ,प्रसारण के बीच भी यह सट्टा अड्डा आसानी से संचालित होकर यहां सुबह से देर रात तक सटोरियों का मजमा लग रहा है ।
आसपास भी अन्य सटोरिये सक्रिय होकर उनका धंधा प्रभावित होने लगा था । यहां पार्टनर सटोरियों और जुआरियों के अन्य अड्डे पहले की तरह संचालित हो रहे थे । दूसरे सटोरियों की तकलीफ यही है ।
पुलिस ने यहां छापा मारकर सट्टा लिखाने आये सटोरियों और लिख रहे एक दो कर्मचारियों को गिरफ्तार कर उनका जुलूस निकाला और रास्ते मे उठक-बैठक भी लगवाई । इस जुलूस मे घरेलू सामान का थैला कंधे पर रखकर चलने वाला सटोरिया चर्चा का विषय रहा । छापामार कार्रवाई औपचारिक और दिखावा चर्चित होती रही और पुलिस भी खुश नजर नहीं आई ।
छापे मे अड्डे के मुख्य संचालकों को बचा लिया गया और अपनी बड़ी सफलता को मजबूरी मे प्रचारित करवाया गया । चर्चा यह भी रही कि छापामार टीम मे इस अड्डे के सहयोगी ,मध्यस्थ भी शामिल रहे ।
कोतवाली से सटोरियों के नाम पते देने मे भी आनाकानी की गई । यह भी नहीं बताया गया कि अड्डा किसका था?कौन चला रहा था? संचालक क्यों नहीं पकड़े गये? ।
एस पी शिवदयालसिंह की नियत और नीति अच्छी है लेकिन विभाग मे अवैध कारोबारियों के सहयोगियों की संख्या अधिक है । ऐसे मे अवैध के विरुद्ध अभियान की सफलता पर संदेह होता है ।
इस समय बागली क्षेत्र मे भी अवैध कारोबार की बहार है । सोनकच्छ सहित जिले के अनेक स्थानों से अवैध कारोबार संचालित होने की ख़बर है ।
एस पी डाक्टर शिवदयालसिंह से अनुरोध है कि वह पत्तीबाजार के सट्टा बाजार और पार्टनरों की जानकारी लेकर जड़ों पर ईमानदार अधिनस्थों से कार्रवाई करवाऐं तभी बड़े सट्टा कारोबारियों पर अंकुश लगाया जा सकता है ।