पर्वत वन उपवन से प्यार
मिले ताज़गी का उपहार

देवास (शाकिर अली दीप) जो प्राणवायु का अमृत बरसाते हैं.. बरखा रानी को अपने सम्मोहन से बुलाते हैं..धरती को दुल्हन की तरह सजाते हैं..दान और सेवा की परिभाषा सिखाते हैं.. जो तेज धूप मे शीतल छाया का महत्व समझाते हैं…
जिनसे हम सेहत और समृद्धि पाते हैं ….उन्हीं पर्यावरण और मानवता के रक्षक ,सैनिक वृक्षों को हम माफियाओं के अत्याचार और हत्या से क्यों नहीं बचा पाते है?
ईश्वर का उपहार , धरती का श्रंगार और जीवन का आधार वृक्षों और वनों की अवैध ,निरंकुश कटाई के मानवीय स्वार्थ ने मानव के साथ पशु-पक्षियों और अन्य प्राणियों के अस्तित्व को ही संकट मे डाल दिया है ।
भारतीय संस्कृति और संस्कारों के दिव्य वातावरण मे निवास करने वालों को सेहत और जीवन का वरदान , दानी और सहज उपलब्ध पेड़ ,पौधे ,लताओं की जानकारी रखना ही चाहिए कि तुलसी ,वट,आंवला और पीपल की पूजा से क्या क्या लाभ है ? नदियों को मां क्यों कहते हैं?
हम वर्षाकाल मे पर्यावरण और जल की सुरक्षा का संकल्प तो दोहराऐं, नये पौधे भी लगाऐं,भारतीय संस्कृति मे प्रकृति के महत्व को समझें और धर्म ग्रन्थों की गहराई मे भी जाऐं, तभी पता चलेगा कि हम उस विराट सभ्यता के वंशज हैं जो प्रकृति से परिवार की तरह रिश्ता रखना सिखाती है ।
ॐ,राम,आरती और आजानों के उच्चारण पवित्र स्वरों, पर्वतों से निकलने वाली नदियों की अमृत धाराओं और वृक्षों के तप से शुद्ध वातावरण मे मानवी स्वार्थ ,अज्ञानता ,लापरवाही का प्रदुषण बढ़ गया है और सांसों मे ताज़गी का आभास नहीं होता ।
वन,उद्यान और उपवन हमे क्या- क्या अनमोल ,दिव्य वरदान देते हैं यह जानना और प्रचारित करना भी आवश्यक है जो हमारे देश के प्रधानमंत्री ,मुख्यमंत्री और आयुर्वेद के विशेषज्ञ कर भी रहे हैं ।
पर्यावरण के पहरेदारों की पूजा,सुरक्षा और सम्मान हमारी संस्कृति और संस्कार हैं । माता-पिता सा स्नेह, आशीष देने वाले वृक्षों को हम सीमेन्ट के जंगलों के लिए क्यों हटवाते और कटवाते हैं? इस पर ध्यान देना ही होगा ।
पेड़ ,पौधे ,वन,उपवन और जल स्त्रोत रहेंगे तो यह प्रकृति स्वर्ग समान बनी रहेगी ।
रेशमी फूलों की सुन्दरता मे मुस्कुराने वाले,सुगंध की भाषा मे बतियाने वाले, बच्चों की तरह खुश हो जाने वाले पौधे और परिवार के मुखिया की तरह आंगन मे खड़े पेड़ों को हमे परिवार का सदस्य ही समझना होगा तभी प्रदुषण और प्राकृतिक आपदाओं को रोका जा सकता है ।
पौधे ,पेड़ ,उपवन ,उद्यान और वन हमारे मित्र बन जाएंगे तब हम बेहतर सेहत और वातावरण पाएंगे ।
वृक्षों मे ही स्वस्थ जीवन का रहस्य छिपा है यह सच्चाई सभी जानते हैं । हमारे देश मे मातृशक्ति ,शक्तिरूपा ,परिवार की श्रेष्ठा नारी सदियों से वृक्षों की पूजा करती हैं । महावीर और अनेक महापुरुषों को वृक्षों के आशीष मे ही ही दिव्य ज्ञान मिला है ।
भारतीय संस्कृति मे आंवला, बेल,बरगद,पीपल,अशोक , आम ,नीम सहित तुलसी और केला पूजनीय होकर अनेक संस्कारों मे इनका उपयोग-प्रयोग किया जाता है । वनऔषधियां ,जड़ी -बूटियां सेहत का वरदान हैं ।
कालोनी ,मोहल्ले और बस्तियों मे पौधे लगाने सहित उनकी सुरक्षा ,सेवा स्वच्छ वातावरण का उपहार देंगे ।
प्रकृति से प्रेम और उसकी सेवा,सुरक्षा का संकल्प दोहरा कर ही हम स्वस्थ और खुश रह सकते हैं ।

