धारा जी घाट श्रद्धालु स्नान के लिए अभी तक पूर्ण नहीं हो पाया

नर्मदा प्रकट उत्सव 8 फरवरी सोमवती अमावस्या 30 मई 101 दिवस 75 दिवस में बनने वाला घाट 30% भी नहीं बन पाया इसे विडंबना कहें या श्रद्धालुओं के धैर्य का पैमाना बड़े उत्साह के साथ एन एच डी सी से आग्रह के बाद 2007 में जलजमाव से लबालब हो गए बाणासुर तपस्थली धारा जी स्नान घाट को पुनः आरंभ करने की कवायद अगले चुनावी वर्ष में होने लग गई। तात्कालिक विधायक दीपक जोशी नर्मदा की कसम खाकर घाट आरंभ करने की बात श्रद्धालुओं को कहने लगे उसके बाद की कहानियां आपको मालूम है। सांसद हो या विधायक श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ करते रहे। हो सकता है कुछ तकनीकी परेशानी उन लोगों के सामने आई हो। कालांतर में परिस्थिति बदली श्रद्धालुओं की मांग मां नर्मदा ने सुनी और शासकीय तौर पर क्षेत्रीय श्रद्धालुओं की बार-बार मांग पर साथ में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की पैदल यात्रा के दौरान उठाई गई मांग को भी समर्थन दिया गया और जैसे तैसे कड़ी मेहनत के बाद एनएसडीसी द्वारा 3 करोड़98 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति मिली । समय बीतता गया टेंडर हुए और नर्मदा प्रकट उत्सव 8 फरवरी 2022 को मंत्रोचार के साथ घाट का भूमि पूजन हुआ। श्रद्धालुओं को 75 दिवस का आश्वासन दिया गया। 75 दिवस बाग 50 बाई 150 मीटर का हर की पेडी डिजाइन वाला सुंदर मनोरम स्नान घाट एवं 3500000 रुपए की लागत से विश्राम वाटिका जो सुंदर वट वृक्षों से सुशोभित होगी और तो और पिपरी से लेकर धारा जी स्नान घाट तक सड़क के दोनों और सुंदर बगीचे एवं पौधों का दृश्य होगा यह सब कल्पना सुनने मात्र में ही बहुत अच्छी लगी इसे संयोग कहें या मां नर्मदा का आशीर्वाद आज 101 दिवस भूमि पूजन के पूर्ण हो चुके हैं और सोमवती अमावस्या भी है। स्नान करने गए श्रद्धालुओं की संख्या भी चार अंको का आंकड़ा पार कर गई है। श्रद्धालुओं की जबानी सुनकर यह खबर लिखना पड़ी । सारंग पुर क्षेत्र से आए श्रद्धालु मुकेश पाटीदार केदार मल हीरालाल आदि ने बताया कि उनके पास पेपर की कटिंग है जिसमें लिखा है ठेकेदार द्वारा 75 दिवस में घाट निर्माण कर स्नान घाट को श्रद्धालु स्नान के लिए खोलने की बात कही है। और वह समझ रहे थे कि धारा जी का दृश्य बदल गया होगा। धरातल पर 30% काम दिखाई दे रहा है। शायद काम भी बंद है। इतनी बड़ी राशि कहां खर्च हो गई बीच में कोई आपदा या बारिश भी नहीं आई जिससे काम अवरुद्ध हो। महिला श्रद्धालु जानकीबाई जो बैरागढ़ भोपाल से आई थी। कहां रही थी मा नर्मदा सबको सद्बुद्धि दे ठंडी छाया का बगीचा उसे भी नहीं दिखाई दिया। बोल बम कावड़ यात्रा के संयोजक गिरधर गुप्ता से पूछा गया आप भूमि पूजन में शामिल थे। उनका कहना है मां नर्मदा की महिमा न्यारी है हमें मां नर्मदा पर भरोसा है। जो हुआ अच्छा हुआ मां नर्मदा जो करेगी वह भी अच्छा ही करेगी । मां नर्मदा का आशीर्वाद भी हमने भोगा है । और क्रोध भी देखा है। बस वह क्रोधित कभी ना हो यही कामना है