देवास। पूर्व पार्षद ठा. जैनेन्द्रसिंह पंवार ने बताया कि नगर निगम का चुनाव अपने शबाब पर है। चुनावी नारों से वार्ड प्रत्याशी, महापौर प्रत्याशी अपने प्रचार वाहनों से आम मतदाताओं को अपनी और लुभाने का प्रयास कर रहे हैं। घर -घर मतदाताओंं के आीशर्वाद लेने का दौर चरम पर है। प्रमुख वार्डो में नगर के सर्वांगीण विकास हेतु स्वच्छ छवि एवं कर्मठ उम्मीदवार को विजयी बनाने की अपील की जा रही है। कई वार्डो में स्थानीय उम्मीदवार को जिताओ और बाहरी उम्मीदवार को हराओ और वार्ड बचाव के नारे भी बुलंद हो रहे हैं। सभी प्रमुख पार्टी के महापौर प्रत्याशियों के मार्ग में निर्दलीय प्रत्याशी रोड़ेे अटका रहे हैं एवं आप पार्टी ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है। महापौर प्रत्याशी को बड़ी जोर आजमाईश करना पड़ रही है। कांगे्रस के कद्दावर नेता एवं प्रदेश कांगे्रस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ आए और भरी बारिश में सभा ली। जिससे कांगे्रस कार्यकर्ताओं में उत्साहवर्धन हुआ। संपूर्ण चुनाव की कमान पैलेस से एवं पार्टी संगठन द्वारा संभाली जा रही है। नगर में चर्चा अनुसार कांगे्रस के प्रत्याशी को समर्थन मिलनेे के आसार बताये जा रहे हैं। भाजपा के उम्मीवार को कमजोर प्रत्याशी के रूप में माना जा रहा है। किंतुु निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में खड़े उम्मीदवार दोनों पार्टी के प्रत्याशियों की जीत में बड़ी बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। सीधा अर्थ यह है कि चुनावी टक्कर काफी कांटेदार है। वोटिंग का दिन आते आते जातिगत समीकरण को देखते हुए बदलाव की प्रबल संभावना आंकी जा रही है। कई वार्डो में ऐसी स्थिति भी बनी हुई है जहां निर्दलीय प्रत्याशियोंं ने भाजपा एवं कांगे्रस के प्रत्याशियों की नाक में दम कर रखा है। 35 वर्षो से मतदाता देख रहे है कि जो भी महापौर प्रथम नागरिक बना उन्होंने अपने ही घर को भरा हे। जिससे पार्षदगण की नगर निगम की काजल की कोठरी में भ्रष्टाचार की कैद में हो गया। आम जनता चाहती है कि बिना भेदभाव से नगर का विकास हो, वो भी बिना भ्रष्टाचार के जिसेस नर की प्रतिष्ठा म.प्र. में बनी रहे। खैर प्रारंभिक चुनावी सर्वेक्षण के आधार पर 16 से 20 वार्डो में भाजपा प्रत्याशियों की जीत का आंकलन किया जा रहा है तथा 10 से 12 पार्षद कांगे्रस के बताये जा रहे हैं शेष पर निर्दलीय बताये जा रहे हैं। आज से चुनाव का अंतिम दौर प्रारंभ हो जाएगा प्रत्याशी जोड़ तोड की राजनीति का सहारा लेकर अपने रिश्तेदारों से, परिचितों के माध्यम से अपने अपने पक्ष में वोट डालने की गुहार लगाएंगे। रूठे हुए को मनाने का प्रयास किया जाएगा। प्रत्याशी बड़े पैमाने पर खर्चा भी करेंगे जो प्रत्येक चुनाव में होता आया है और होता रहेगा। आचार संहिता का पालन कौन किस प्रकार करता है उसके लिए जिला प्रशासन की पैनी नजर है। चुनाव का मुकाबला काफी रोचक स्थिति में पहुंच गया है। आम मतदाताओं के बीच चौराहो पर चर्चा हो रही है देखते हैं ऊट किस करवट बैठता है।

