कोई भी दल दावा करने की स्थिति में नहीं राजनैतिक दलों में सन्नाटे का माहौल – ठा. जैनेन्द्रसिंह पंवार


देवास। 13 जुलाई गुरू पूर्णिमा के शुभ अवसर पर नगर निगम चुनाव की वोटिंग संपनन हुई। देवास नगर निगम की नई परिषद के गठन को लेकर मतदान का प्रतिशत अधिक होने के कारण कोई भी राजनैतिक दल यह दावा करने का प्रयास नहीं कर रहा है कि हमारा महापौर प्रत्याशी जीतेगा या हमारी परिषद बनेगी। चुनाव परिणाम की तारीख जैसे जैसे नजदीक आ रही है महापौर प्रत्याशियों और वार्ड प्रत्याशियों के दिलों की धड़कन घट बड़ रही है। कार्यकर्ताओंं के अनुमान के कारण राजनैतिक क्षेत्रों में यह कयास जोरों पर है कि अधिक मतदान भाजपा के पक्ष में जाता है और कम मतदान कांगे्रस के पक्ष में। निर्र्दलीय उम्मीदवारों ने भी दोनों राजनैतिक दलों का गणित बिगाड़ा है। जहां एक वर्ग ने खुलकर कांगे्रस के पक्ष में मतदान किया है तो दूसरी ओर जातिगत समीकरणों को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता है। भाजपा के लोगों से पूछा जाता है तो कांगे्रस के महापोर जीत का हकदार बताते है और कांगे्रस के लोगों से पूछते हैं तो बताते है कि मतदान अधिक हुआ है भाजपा जीतेगी। किंतुु इस प्रकार के कायस लगाया जाना और किसी भी दल से दावा नहीं किया जाता। यह प्रतीत होता है कि दोनों दल ही अपनी जीत की संभावना टटोल रहे हैं।
इसी प्रकार वार्ड प्रत्याशी अपने अपने स्तर पर यह जानने का प्रयास कर रहा है कि हमारी जीत होगी या हार का सामना करना पड़ेगा। बारिश के कारण सुबह मतदान काफी धीमा रहा, किंतु दोपहर 2 बजे से प्रत्येक वार्ड में कतारों में आम मतदाताओं ने अपने वोट का प्रयोग किया। कई वार्डो में आम मतदाता वोट डालते नजर आए। कई जगहों पर मतदाता को अन्य वार्ड में जोड दिया गया जिस कारण बहुत से मतदाता वोट नहीं डाल पाए । राजनैतिक दबाव से चुनाव को वार्ड में नियुक्त बीएलओ के निर्दे्रश पर जोडऩे और काटने की प्रक्रिया की गई। जिससे जिला प्रशासन का दावा झूठा साबित होता है कि शत प्रतिशत मतदाताओ को घर घर पर्ची बांटी गई। इस प्रकार से बीएलओ और उनके आदेश पर वार्डो में कार्य करने वाले कर्मचारियों की जांच पड़ताल करके शोकाज नोटिस दिया जाकर तुरंत निलंबित किया जाना चाहिये। इस प्रकार की गंभीर त्रुटियां राजनेतिक दलों के नेताओ के नेतृत्व पर प्रश्र चिन्ह लगाती है। मेरा जिला प्रशासन से आग्रह है कि इस ओर कड़ी से कड़ी कार्रवाई संबंधित कर्मचारी पर करे जिससे भविष्य में इस प्र्रकार से राजनैतिक दबाव में गलत कार्य का प्रयास न हो।
20 जुलाई को परिणाम का इंतजार सभी दलों का है, सब अपने अपने ताने बाने बुनने में लगे हैं, आरोप औैर प्रत्यारोप का दौर भी आएगा। कोई सभापति के सपने देख रहे हैं तो कोई राजनैतिक जोड़ तोड का गणित बिठाने में लगा है। जिनको वादा किया गया है वे भी मन ही मन खुशी मना रहे हैं। आम जनता यह चाहती है कि भ्रष्टाचार से मुक्त नगर निगम की कार्यप्रणाली मितव्ययता नीति और पारदर्शिता लिये होनी चाहिये जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। मुख्यमंत्री की चुनाव के दौरान आम मतदाताओं से किया गया वादा पैकी प्लाट की व्यवस्था भी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस पर तुरंत अमल किया जाना सरकार का नैतिक दायित्व है