देश में बदलते हुए राजनैतिक परिवोश में गंभीर सोच के साथ मितव्ययिता एवं पारदर्शिता नीति का अमल में लाना सभी राजनैतिक दल का कर्तव्य है


देवास। ठा. जैनेन्द्रसिंह पंवार ने बताया कि देश में तेजी से बढ़ते हुए राजनैतिक घटनाक्रम के अंतर्गत सभी राजनैतिक दलों के लिये मितव्ययिता एवं पारदर्शिता का पालन का अनुसरण करना स्वच्छ राजनीति का संकेत हो सकता है। दिल्ली सरकार का लक्ष्य दिल्ली को दुनिया का नम्बर 1 बनाना है जिसके तहत निर्माण कार्यो में गुणवत्तापूर्ण एवं मितव्ययिता नीति का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए दिल्ली की सड़कों को यूरोप के तर्ज पर सुंदर बनाने के लिये निरंतर कार्य चल रहा है। किसी परियोजना में 100 करोड, किसी में 125 करोड, किसी में 75 करोड तो किसी में 50 करोड बचाए गए। इसी दृष्टि कोण के तहत दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 500 करोड रूपये बचाकर अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस प्रकार केजरीवाल सरकार ने परियोजनाओं में तकनीकी बदलाव करते हुए निर्धारित समय के पूर्व कार्य करवाए जो कि देश के लिये एक मॉडल है। किंतु अन्य प्रदेशों में नौकरशाही एवं राजनेताओं की सांठगांठ से परियोजनाओं की लागत कम न करते हुए उसको कई गुना बढृा दिया जाता है जो सीधी सीधे भ्रष्टाचार को रेखांकित करता है। बाम्बे में मेट्रो ट्रेनों की परियोजना की लागत पूर्व सरकार की करोड़ों की योजना में वृद्धि करके और करोड़ों रूपये बढ़ा दिए गए जो कि सरकार की मितव्ययिता नीति का उदाहरण नहीं है। आखिर क्यों। भोपाल जबलपुर यानी नेशनल हाई वे नं. 12 पर मंडी दीप के पास कालिया सोस नदी पर बने पुल की एप्रोच रोड और उसकी रिटर्निंग वाल ढह गइ। जिससे 529 करोड रू इस पूरे प्रोजेक्ट की क्वालिटी पर गंभीर सवाल उठने लगे है। इस प्रकार की घटनाएं पूर्व में भी कई राज्यों में हुई है। इनकी रोकथाम का उपाय निर्रथक साबित हो रहा है। देवास नगर के जिला अस्पताल का ताजा उदाहरण समाचार पत्रों में देखने को मिला जिसमें कायाकल्प के लिये लगभग 3 करोड से ज्यादा खर्च हुआ परंतु गुणवत्ता के आधार पर निर्माण नहीं किया जाना भ्रष्टाचार की ओर इंगित करता है। कुछ दिन पूर्व देवास जिले के कन्नौद में सिविल अस्पताल को 50 बेड में तब्दील करनेे के लिये दो मंजिला भवन का कार्य जारी है जिसमेंं गुणवत्तहीन कार्य किया जा रहा है। बालू रेत का उपयोग, बीम में पर्याप्त सरिये का उपयोग नहीं किया गया है। साथ ही सीमेंट की ईट लगाने की जगह मिट्टी की लाल ईटेे लगा दी गई है जो भारी भ्रष्टाचार को इंगित करता है। अक्सर समाचार पत्रों में सुर्खियां बनी रहती है कि पहली बारिश होते ही नई निर्माणाधीन सड़के उखड़ जाती है, पुलियाएं बह जाती है यह भ्रष्टाचार की ओर इंगित करता है।
विभिन्न एजेंसियोंं को राजनैतिक प्रेशर में आकर ठेकेदारों को वर्क दे दिया जाता है इस कारण से जनता के पैसों की खुली बर्बादी देवास जिला अस्पताल में देखने को मिल रही है। पूर्व में भी जिला अस्पताल को लेकर भारी आरोप लगे हैं। किंतु राजनीति के कारण जिला प्रशासन भी मौन धारण कर लेता है। प्रशासन को चाहिये कि संबंधित एजेंसियों से जनता के पैसों की भरपार्ई करे ताकि भ्रष्टाचार में शामिल सरकारी नुमाईंदों का भी सच सामने आ सके। इसी प्रकार देश के विभिन्न राज्यों में अवैध खनन का कारोबार भी चरम सीमा पार कर चुका है। कर्नाटक, आंध्र, मध्यप्रदेश जहां पर अवैध खनन माफियाओं के लिये जान से मारना मामूली हो गया है। आयपीएस अधिकारी, डिप्टी रेंजर, फारेस्ट गार्ड, को मार देने और अनेक अधिकारियों को मारने के प्रयास करने के बाद भी ग्वालियर, मुरेना बार्डर क्षेत्र में सरकार द्वारा ठोस कार्यवाही नहीं की जाना सरकार की मंशा को रेखांकित करता है। जब जब सरकारें बदली है, तबादला नीती उद्योग में भ्रष्टाचार का प्रमुख बन गया है। राजनेताओं को ओर चुने हुए जनप्रतिनिधियों को जानकारी में रहता है। जिसे मकिस अधिकारी को लाया जावे ताकि अपने अनुसार कार्यो को अंजाम दिया जा सके एवं मिल जुलकर पौ बारह हो सके। सरकारो को चाहिये कि नियमानुसार 2-3 वर्षो के लये अच्छे प्रशासनिक एवं मितव्ययिता नीति का पालन करते हुए सरकारी खजाने को भी बचाने में सहायक हो। मिली जुली कुश्ती में तो बड़ा गर्ग दिखाई पड़ता है। देश के सभी राज्यों को चाहिये कि दिल्ली के अरविंद केजरीवाल के मॉडल को अपनाये ताकि पारदर्शिता नीति एवं मितव्ययिता नीति का पालन सभी राजनैतिक दल कर सके। सिर्फ इच्छा शक्ति दृढ़ हो। इसी प्रकार छत्तीसगढ में मुख्यमंत्री भूपेश सरकार मुख्यमंत्री गौधन योजना चला रही है। इस योजना के अंतर्गत सरकार पशुपालकों को गौ वंश का गोबर 2 रू प्रतिकिलों की दर से खरीदती है। जिससे पशु पालकों को लाभांवित किया जा सके। सरकार किसानों से गोबर खरीदकर वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाती है। खरीदे गए गोबर से रसाई गैस, बिजली बनाने का काय्र प्रारंभ किया जा चुका है। अब छत्तीसगढ सरकार 4 रू प्रति किलो गौमूत्र खरीदेगी। गौ मूत्र की खरीदी से राज्य में जैविक खेती के प्रयासों को बढ़ाने में और अधिक मदद मिलेगी। छत्तीसगढ सरकार की किसान हितेषी नीतियों और कार्यक्रमों के चलते किसानी भी समृद्ध हुई है। सरकार की गौ धन न्यास ने देश में अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है। जिसकी तारीफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कृषि मामले की संसदी समिति भी कर चुकी है। म.प्र. सरकार को चाहिये कि आए दिन राजमार्र्र्गो पर सैकड़ों विचरण कर रहे है उनके रख रखाव की व्यवस्था करने के लिये गौ शाला प्रमुख को उचित निर्देश दें। इनकी वजह से रात के समय आने जाने वाली गाडियों को दुर्घटना का भय रहता है। सरकार को चाहिये कि इसके लिए उचित कदम उठाये। हाल ही में मध्यप्रदेश के नवनिर्वाचित जनपद व जिला पंचायत अध्यक्षों को चाहिये कि वो चाहे भाजपा का हो या कांगे्रस का। छत्तीसगढ के मुुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार की गौधन न्यास योजना को अपनी अपनी जिला पंचायतों से म.प्र. सरकार को अनुमोदन करके प्रस्ताव भेजे ताकि म.प्र. के किसानों को भी इस योजना का लाभ मिले और इस ओर प्रेरित हो सके।