शराब ठेकेदारों से गुपचुप पार्टनरशिप खुला याराना निभाने में व्यस्त आबकारी विभाग।

कच्ची शराब, महुआ लहान का झुनझुना पकड़कर बन रहे ठेकेदारों के चहेते।

क्या विभाग की मुखिया बंदना पांडे इन कुकृतयों से अंजान है या फिर कलेक्टर के इशारे पर बंधना पांडे ने ही सब को फ्री फ़ॉर आल की छूट दे रखी है?

अदम्य/देवास /पंडित अजय शर्मा/-देवास में शहर ही नहीं पूरे देवास जिले भर में शराब ठेकेदारों ने आबकारी विभाग को अपनी जेब में बिठा रखा है। साइलेंट पार्टनर बनाकर अपनी उंगलियों के इशारों पर जैसा चाहे वैसा नचा रहे हैं । शराब ठेकेदार मनमर्जी से बेखौफ होकर चार पहिया वाहनों से अवैध शराब का परिवहन कर ढाबो एवं होटलों पर शराब खपा रहे हैं । और आबकारी विभाग के अधिकारी सहित कर्मचारी भी ठेकेदारों से चांदी के चप्पल जूते खाकर अपने आपको महान इज्जतदार समझ शासन को लाखों का चूना लगाने में और भोली भाली जनता को ठगने में कुख्यात मास्टरमाइंड हो गये हैं।अपने आप पीठ थपथपाने के लिए जनता व शासन प्रशासन को गुमराह करने के लिए कच्ची शराब और महुआ लहान पकड़कर ठेकेदारों के चहेते बन रहे हैं।
लेकिन आबकारी विभाग की इतनी ताकत नहीं है कि वह सामने से गुजरती हुई शराब ठेकेदार की शराब से भरी हुई गाड़ी चार पहिया वाहन को पकड़ ले। यदि गाड़ी पकड़ ली तो ठेकेदार नाराज हो जाएगा और कई सारी सुविधाएं मिलना बंद हो जाएगी। यह आलम पूरे जिले में फैला हुआ है ।
बेखौफ होकर शराब ठेकेदार खुलेआम अवैध शराब का तांडव मचा रहे हैं । और आबकारी विभाग के नुमाइंदे लापरवाह होकर खाकी और खादी को दागदार करने पर तुले हुए हैं। दिलचस्प बात यह है कि आबकारी विभाग को ठेकेदारों कि हरेक हरकत की सूचना रहती है । कि कहां किस गाड़ी से अवैध शराब जा रही है। लेकिन कोई भी शराब ठेकेदार से बुरा नहीं बनना चाहता है। जिसके चलते पूरे क्षेत्र में अवैध शराब के कारोबार का मायाजाल बिछा हुआ है।
समझ में यह नहीं आता है की आबकारी विभाग आखिर ड्यूटी किसकी बजा रहा है। कई बार आबकारी विभाग के जिम्मेदारों को शराब ठेकेदारों के यहां हाजरी भरते देखा गया है। आबकारी विभाग आए दिन जिला कलेक्टर महोदय के मार्गदर्शन का हवाला देकर छोटी मोटी कार्यवाही का प्रेस नोट जारी कर देते हैं । लेकिन सवाल यह खड़ा होता है कि क्या जिला कलेक्टर ने आबकारी विभाग को भी यह बोल रखा है की केवल महुआ लहान ओर कच्ची शराब ही पकड़ना? शराब ठेकेदारों की शराब से भरी अवैध गाड़ी बिल्कुल मत पकड़ना? कुल मिलाकर देखा जाए तो विभाग अपनी मनमर्जी से जिला प्रशासन की साख पर बट्टा लगा रहा है। जब से वंदना पांडेय जिला आबकारी अधिकारी के तौर पर देवास में पदस्थ हुई है। तभी से आबकारी विभाग के सभी नुमाइंदे बेपरवाह होकर मनमाने तरीके से सरकार को चूना लगा कर अपने निजी आर्थिक स्वार्थ के लिए ठेकेदारों को खुश करने की होड़ में लगे हुए है। पूरे मामले में आबकारी विभाग की जिला अधिकारी वंदना पांडेय की कार्यप्रणाली संदिग्ध नजर आती है। कि विभाग की मुखिया होने के बाद उन्हें इन सारी बातों की खबर नहीं है । या फिर कलेक्टर के इशारे पर या नाम कि आड़ में बंदना पांडे ने ही सब को फ्री फ़ॉर आल की छूट दे रखी है। क्यों कि आबकारी विभाग से हर दो चार दिन बाद एक प्रेस नोट जारी होता है उसमें स्पष्ट लिखा रहता है कि कलेक्टर साहब के निर्देश व आदेशानुसार आबकारी अधिकारी बंदना पांडे के मार्गदर्शन में आबकारी विभाग कि टीम ने फलां जगह दबीस दी जहां से इतनी कच्ची शराब व इतना लाहन महुआ पकड़ा गया जिसकि किमत इतनी है। अब सवाल यह है कि क्या कलेक्टर साहब के निर्देश व आदेश महुआ लाहन पकड़ने के लिए ही होते हैं? ठेकेदारों के धांधली पकड़ने के लिए क्या कलेक्टर साहब ने पांडे जी को मना किया है ? या कलेक्टर साहब के नाम कि आड़ बंदना पांडे ले रही है ? ये कलेक्टर साहब को जांच कर अपने नाम व पद को शंका के घेरे से निकालने का विषय है। जो आबकारी विभाग खुलेआम शंका के दायरे में अपने भ्रष्टाचार के गौरख धंधे में डालकर किस तरहां फंसा रहा है? ये गंभीर जांच कि विषय है।