देवास / बागली – सपनों की अपनी अलग दुनिया है। मानो या ना मानो निश्चित रूप में स्वप्न कर्म प्रधान व्यक्ति हो या नहीं उसे भी आते हैं और यह किसी संदेश से परिपूर्ण रहते हैं । वर्तमान संपन्न जैन समाज जिन को पूजता है। तीर्थंकर भगवान उनके इतिहास और धार्मिक ग्रंथ को अध्ययन करें तो स्वप्न का बहुत महत्व बताया गया है। स्वप्न के चलते ही वह वैराग्य धारण करने का मार्ग चलते हैं । सनातन धर्म में कई वृतांत ऐसे हैं जो स्वप्न से जुड़े हैं और उनका पालन भी हुआ है। राजा हरिश्चंद्र स्वप्न में राज पाठ छोड़ दिया था। श्राद्ध पक्ष में 16 दिन किसी न किसी रूप में परिवार की दिवंगत आत्मा है। स्वप्न में आती है, बहुत सारे लोग उसका संदेश और अर्थ नहीं समझ पाते लेकिन दिवंगत आत्माओं का स्वप्न में आना अच्छा सूचक है। या यूं कहें वह इस बहाने आपको इशारा करते हैं कि श्राद्ध पक्ष में उन्हें भी याद करो। स्वप्न के फल कई प्रकार के होते हैं व्यस्ततम जिंदगी में अफसर देखने वाला व्यक्ति नींद में आए स्वप्न भूलको जाता हैं । आने वाली दो तिथि महत्वपूर्ण है घायल 14(चौवदस) और पित्र अमावस्या, हम जहां भी हो जैसी भी स्थिति में हो शांति से ज्ञात अज्ञात लोगों को तर्पण करें। घर परिवार में हो तो घी एवं गुड़ की धूप अवश्य दे जिस प्रकार कोरोनावायरस अदृश्य होकर भी असरकारी था। मोबाइल में तार नहीं होने के बावजूद भी नेट कनेक्टिविटी सक्रिय रहती है। उसी प्रकार हमारे द्वारा दी गई धूप एवं की गई प्रार्थना ब्रह्मांड में सुक्ष्म रुप से फैल जाती है! जिस प्रकार जिसका नंबर डायल करने पर उसी को मोबाइल लगता है बस यही सिद्धांत तर्पण और श्रद्धा में काम करता है।

