संस्कार ,संस्कृति एवं संस्कृत की त्रिवेणी थे ब्रह्मलीन पंडित मुकुंद मुनि जी– दंडी स्वामी नित्य मुक्तानंद जी

बागली – पंडित मुकुंद मुनि जी स्मरण दिवस पर उक्त विचार फाल्गुन शुक्ल द्वादशी को वाग्योग चेतना पीठम् आश्रम के संस्थापक ब्रह्मलीन परम पूज्य मुकुंद मुनि पंडित रामाधार जी द्विवेदी के द्वितीय पुण्य स्मरण दिवस पर आयोजित पंच दिवसीय रूद्र महायज्ञ के समापन के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मुख्यअतिथि माँ धूमावती शक्तिपीठ सोनकच्छ के दंडीस्वामी प पू स्वामी नित्यमुक्तानंद तीर्थ जी महाराज ने व्यक्त किए। इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में भिंड आश्रम से पधारे परम पूज्य ब्रह्मचारी स्वामी कृष्ण चैतन्य जी महाराज, नारायण कूटी सन्यास आश्रम देवास से पधारे स्वामी माधवानंद जी तीर्थ जोबट कुटी इंदौर से स्वामी श्रीहरीशानंद जी तीर्थ ,पिपलेश्वर महादेव सोनकच्छ से स्वामी श्री लवचंद्रदास जी, तालोद आश्रम से स्वामी श्री भानुदास जी ,ललितपुर झांसी से स्वामी संतमुनि जी, चित्रकूट से संत श्री रामलखनदास जी ,धाराजी तीर्थ से बंगाली बाबा जी, संस्कृत के उद्भट विद्वान पंडित ओम प्रकाश जी दुबे, पूर्व शिक्षा मंत्री दीपक जोशी आदिवासी वित्त विकास राज्यमंत्री प्रतिनिधि सुनील बारेला बागली नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष अमोल राठौर उपाध्यक्ष श्रीमती आरती विपिन शिवहरे आदि ने कहा कि मुकुंद मुनि पंडित रामाधार जी द्विवेदी बागली ही नही वरन संपूर्ण मालवा क्षेत्र मैं संस्कृत के श्रेष्ठ विद्वान एवं शक्तिपात परंपरा के योग्य गुरु थे। सभी अतिथियों ने अपने श्रद्धा सुमन परम पूज्य गुरुदेव के चरणों में समर्पित किये। अतिथियों का स्वागत आश्रम के संचालक पं कनिष्क द्विवेदी, वरिष्ठ साधक गोपाल शर्मा ,मुकेश शर्मा एवं पंडित जीवन लाल अग्निहोत्री प्राच्य विद्या समिति के अध्यक्ष महेश सोनी ने किया। कार्यक्रम का संचालन संस्कृत विद्यालय के प्रधानाचार्य पंडित राकेश नागोरी ने किया एवं आभार प्रदर्शन वाग्योग चेतना पीठम् संस्कृत विद्यालय के प्रधानाचार्य पंडित ओमप्रकाश शर्मा ने किया। कार्यक्रम में दूर-दूर से मुकुंद मुनि जी के प्रिय छात्र एवं शक्तिपात परंपरा के साधक गण उपस्थित रहे ।