नगर निगम की गौशाला में गौसेवा गौरख धंधा.. रोज मरने की अवस्था मे पड़ी रहती है एक दो गाये . (भाग 1)


देवास। देवास की शंकरगढ़ स्थित गौशाला नगर निगम के अधिकारियों की मिली भगत से गौवंश की संख्या निरंतर कम होती जा रही है। निगम की इस गौशाला में नगर निगम में उपलब्ध पशु पकड़ने के रिकार्ड और पूर्व में उपलब्ध पशु की संख्या के आधार पर इस गौशाला में गौवंश की संख्या 750 के लगभग होना चाहिए लेकिन फिलहाल में यहां पर मात्र 250 ही गौवंश दिखाई दे रहा है। इसके अलावा यहां पर विभिन्न थाना क्षेत्रों से भी अलग अलग संख्या में गायों को पकड़ कर इसी गौशाला में छोड़ा जाता रहा है जो भी अलग अलग 12 पशु क्रूरता के प्रकरणों के अनुसार 250 के लगभग गौवंश इसी गौशाला में छोड़ा गया है लेकिन यहां पर गायों की संख्या में कमी किसी बड़े षड्यंत्र, गायों के चमड़ा, सींग और हड्डियों के लिए विक्रय किए जाने का संकेत देती है।
सूचना के अधिकार के अंतर्गत प्रदान जानकारी में नगर निगम द्वारा अपने पशु पकड़ने वाले वाहन के माध्यम से विगत वर्षों में एक हजार के लगभग गौवंश पकड़ कर शंकरगढ़ लाए गए लेकिन वापस किए गए पशु का आंकड़ा निगम नहीं दे पाया और पशु वापस छोड़े जाने के लिए जो रसीद निगम द्वारा काटी जाती है उसमे भी पशु छोड़ने का उल्लेख नहीं होता है मात्र गंदगी फैलाने का अर्थदंड की रसीद दी जाती है जो भी नाम मात्र की 20 से 30 रसीद निगम द्वारा अवलोकन कराया गया है।
अब प्रश्न यह उठता है कि यदि निगम की गौशाला मे 1000 गायें पकड़ कर लाई गई तो आखिर ये गायेँ कहां चली गई? क्या निगम ने उन गायों को वापस आवारा विचरण करने केलिए छोड़ दिया, किन्ही अन्य व्यक्तियों, गौवंश का अवैध व्यापार करने वालों को बेच दिया, चमड़े हड्डियों को सींग का अवैध तरीके से व्यापार करने वालों को दे दिया या फिर कसाइयों को?
निजी संस्था को दिया है ठेका लेकिन निगम नियम विरुद्ध करता है खर्च।
वैसे तो इस गौशाला का ठेका एक सांस्कृतिक कार्यक्रम करने वाली संस्था को दिया गया है जो कि अनुबंध के नियम और शर्तों के अनुसार कोई कार्य नहीं कर रही है। कमीशन के लालच में निगम द्वारा नियम और अनुबंध के विपरीत लगातार लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं जबकि सारा निर्माण और खर्च संस्था को करना है ये अनुबंध में उल्लेख है। गायों ने चारे की व्यवस्था भी संस्था को करना अनिवार्य है लेकिन नगर निगम द्वारा लगभग 15000 से 20000 रुपए चारे का व्यय किया जा रहा है जो कि दरोगा संतोष टांक द्वारा बताया गया। चारे और भूसे के गौरखधंधे में भी निगम को कमीशन और संस्था को लगातार फायदा हो रहा है। ठेके की शर्तों के अनुसार निगम को सिर्फ साफ सफाई की व्यवस्था करना होती है लेकिन निगम के दर्जन भर कर्मचारी और एक दरोगा खुद गौशाला में सेवा देते नजर आते हैं और सेवा के नाम पर गौशाला के ठेकेदार को गौपालन बोर्ड से अनुदान भी मिलता है जो कहां खर्च होता है इसका कोई अंदाजा नहीं है। निगम द्वारा निजी संस्था को लाभ पहुंचाने के लिए लाखो रुपए का विकास कार्य करके और गौशाला में निगम कर्मचारियों को लगाकर निगम को प्रतिमाह लाखो का चूना लगाया जा रहा है और ठेकेदार को फायदा पहुंचाया जा रहा है।
षड्यंत्र के साथ किया जाता है सीसीटीवी कैमरों को बंद।
नगर निगम में कुत्तों की नसबंदी के लिए कुछ समय के लिए आए अधिकारी पवन माहेश्वरी ने गौशाला की दशा सुधारने के बीड़ा उठाया था, इलाज के लिए डॉक्टरों की व्यवस्था करने के साथ ही निगरानी के उद्देश्य से उन्होहे सीसीटीवी कैमरे लगवाए थे जिससे कि अनाधिकृत लोगों और कार्यों पर प्रभावी नियंत्रण हुआ था। उनके जाते ही योजनाबद्ध तरीके से सीसीटीवी कैमरे बंद करा दिए गए थे और निगम की पशु पकड़ने वाली गाड़ी भी मध्यरात्रि में ने गायों को पकड़ने का कार्य अमीन दरोगा के नेतृत्व में होने लगा था। रात्रिकाल में पशु को पकड़ना पशु क्रूरता में आता है जिस पर पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने रात्रिकालीन शिफ्ट में गाय पकड़ने की शिकायत आयुक्त को की जिसके बाद से रात्रि में पशु पकड़ने वाले वाहन का संचालन सिर्फ इमरजेंसी में दुर्घनटाग्रस्त गायों के लिए ही करने को कहा गया। जब भी इस गौशाला में दुर्घटनाग्रस्त या बीमार गाय आती हैं इसके कुछ ही दिनों में उनकी मृत्यु हो जाती है और फिर उनको कैमरे से बचा कर दूसरे गुप्त दरवाजे के चर्मकार को चमड़े और हड्डियों के लिए बेच दिया जाता है। सूचना के अधिकार में कैमरे की रिकॉर्डिंग मांगने पर गौशाला के प्रभारी अधिकारी शैलेंद्र परिहार द्वारा कैमरा बंद होना ही बता कर सीसीटीवी की रिकॉर्डिंग देने से मना किया गया जबकि वहां के दरोगा संतोष टांक ने बताया कि 2 कैमरे ऐसी लोकेशन पर लगाए गए हैं जो कि सिर्फ नाम मात्र के इलाके को कवर करते हैं मुख्य द्वार और पिछले गुप्त द्वार से ही मृत्यु की ओर बीमार गायों को बाहर कर दिया जाता है जिसका कोई रिकॉर्ड न तो रजिस्टर में दर्ज होता है न ही कोई डॉक्टर को पता चलता है।
पशुओं के भौतिक सत्यापन कराने के आवेदन पर गायों को तत्काल दूसरी जगह शिफ्ट कराया
गौशाला में रात्रि काल मे गौशाला में गुप्त दरवाजों से गायों का परिवहन कर गायों की संख्या कम की जाने लगी। निगम और गौशाला के रिकॉर्ड अनुसार और उपलब्ध गायों में बड़ा अंतर सामने आने पर गायों के भौतिक सत्यापन और गिनती केलिए निगम आयुक्त को आवेदन किया गया लेकिन गौ तस्करी का भांडा फूटने के डर से ताबड़तोड़ कुछ गायों को आगर मालवा स्थित गौ अभ्यारण्य भिजवा दिया गया। अभ्यारण्य में भी जिन गायों को भिजवाया गया वो बहुत ही कमज़ोर अवस्था में थी लेकिन फिर भी उनका डॉक्टर द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया और यह दिखाने के लिए कि हमने कुछ गायों को गौ उभयारण भेज दिया गया है इससे भौतिक सत्यापन प्रभावित हो सके और गायों की संख्यात्मक गणना में गौ अभ्यारण्य भेजी गई तकरीबन डेढ़ सौ गायों को ज्यादा आंकड़ा बढाकर दिखाया जा सके।
एक हजार से अधिक गौवंश कहां गए और मृत गायों के शव के साथ किस प्रकार दुर्व्यवहार करके शव को किस प्रकार क्षेत्र विक्षत किया जाता है पढ़िए अगले अंक में…..