प्रार्थनाओं की परम शक्ति से होगा पराजीत प्रशासनिक प्रतिबंध और सख्ती से नहीं (विधाता से बड़ा नहीं हे वायरस)

 

देवास(शाकिर अली दीप/खुमानसिंह बैस) प्रथमपूज्य,विघ्नहर्ता का दरबार सजाऐंगे … श्रद्धा से महिमा गाऐंगे… प्रार्थनाओं के आवेदन लगाऐंगे तभी तो कोविड-19 पर विजय पाऐंगे । इसलिए कि सामूहिक प्रार्थना मे ही शक्ति होती है ।
भारत विश्व का अद्भुत और अद्वितीय देश है जिसमे समान रूप से पूजा,आरती,अजा़न,इबादत,अरदास ,घंटियों और प्रेयर की दिव्य शक्तियों से वातावरण मे ताज़गी बनी रहती है और रामराम, राधेराधे,जय श्रीकृष्ण ,जय महांकाल और जय माता दी के अभिवादन हमारी संस्कृति का आधार हैं ।
इतिहास और धार्मिक ग्रंथों मे अनेक संकट और महामारी के उल्लेख हैं जिनका समाधान श्रद्धा और प्रार्थनाओं की शक्ति से किया गया है । कोविड-19 वायरस विज्ञान के सामने चुनौती हो सकता है विधाता के सामने नहीं । अगर हमे उस सर्वशक्तिमान से अधिक वायरस का डर है तो उसके प्रहार से कोई नहीं बचा सकता । क्योंकि जब परिस्थितियां नियंत्रण मे नहीं होती हैं तब वैज्ञानिक और डॉक्टर यही कहते हैं कि अब प्रार्थना कीजिए ,ईश्वर अल्लाह पर भरोसा रखिए ।
शासन प्रशासन के प्रचार – प्रसार मे सभी नियम-निर्देश हैं लेकिन श्रद्धा के शीर्ष देश मे ईश्वर पर भरोसा रखिए का कोई उल्लेख नहीं, मीडिया के माध्यम से डर और दहशत का नकारात्मक प्रचार अधिक हो रहा है । बिना टीका इजाद के हमारे चिकित्सालय कोविड-19 के मरीजो को ठीक कर रहे हैं,बच्चे और बूढ़े वायरस पर भारी हैं । भारतीयों की रोग प्रतिरोधक क्षमता 80% वायरस को निष्क्रिय करने की है । गरीब बस्तियों मे यह असरदार नहीं है,ग्रामीण क्षेत्रों मे यह पराजित है फिर भी इसका डर क्यों है ? का उत्तर है श्रद्धा और विश्वास की कमी ।
शासन और प्रशासन नियमों का पालन और प्रचार कराऐं लेकिन श्रद्धा के आयोजन पर प्रतिबंध न लगाऐं । हम हमारे आराध्य के त्यौहार ,उत्सव नहीं मनाऐंगे तो श्रद्धा और भक्ति के शीर्ष कैसे कहलाऐंगे ? ।
पूजा घरों की आबाद रहने दो,श्रद्धा और भक्ति को आजा़द रहने दो । विश्वास की कंचन ज्योति को अखण्ड रहना चाहिए ,श्रद्धा की सरिताओं पर प्रतिबंध कैसा?। हम हमारे श्रद्धा स्थलों पर जाऐं , त्यौहार मनाऐं और नियमो का पालन भी होता रहे ।
कोविड-19 के पलायन का समय आ गया है । हमारी प्रार्थनाओं की शक्ति और भक्ति ही हमे वायरस से मुक्ति दिला सकती है यही स्वर्णिम सत्य है । हम भी धार्मिक त्यौहारों और अवसरों पर प्रतिस्पर्धा छोड़कर अपने आराध्य को ही समर्पित रहें और हम देखेंगे हम विजेता हैं । सकारात्मकता ,सद्भावना ,सेवा और सहयोग की शक्ति से ही वायरस का सफाया होगा सख्त नियम और सख्ती से नहीं । हम नियमों से बंधे रहें लेकिन श्रद्धा के घर स्वतंत्र रहना चाहिए इसलिए कि श्रद्धा है तो सफलता है और विश्वास है तो विजय ।