देवास। पहचान नशा मुक्ति केंद्र जामगोद के प्रबंधक बिप्रतीप मुखर्जी ने बताया कि हमारी संस्था के खिलाफ सुनील वर्मा, रोहित शर्मा, श्रवणसिंह बैस ने जो प्रेस नोट जारी कर आरोप लगाए हैं, वे निराधार व गलत हैं। हम पर आरोप लगाकर कहा गया है कि हमारे यहां कोई डिग्रीधारी डॉक्टर नहीं आता है। इस संबंध में हमारा कहना है कि हमारे यहां एमबीबीएस, एमडी (मनोवैज्ञानिक) डॉ. सागर मुद्गल नियमित रूप से आते हैं। उन्हीं के निर्देशानुसार मरीजों को दवाई-गोली दी जाती है। डॉक्टर की डिग्री भी संलग्न है।
जैसा कि मकान के क्षेत्रफल के बारे में कहा गया है कि वह 2000 स्क्वेयर फीट मकान था, जबकि वह 3200 स्क्वेयर फीट मकान है। वहीं पार्किंग, गार्डन और ऑफिस अलग है।
पूर्व में सुनील वर्मा द्वारा मुझसे रुपए की मांग की गई थी और नहीं देने पर उसके द्वारा हमारे खिलाफ झूठे प्रेस नोट जारी किए गए। इसकी शिकायत पूर्व में हमारे द्वारा बीएनपी थाने में 22 फरवरी 2024 को की गई थी, जिसकी प्रति संलग्न है।
हमारे सेंटर पर चौबीस घंटे सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं, जिसके माध्यम से मरीजों की निगरानी की जाती है।
नशामुक्ति केंद्र संचालन के लिए कोई भी नशामुक्ति केंद्र तीन वर्ष के लिए कार्यरत होना चाहिए। इसके बाद ही कोई इसकी मान्यता के लिए आवेदन कर सकता है। पूरे मध्यप्रदेश में 203 नशामुक्ति केंद्रों द्वारा ऑनलाइन आवेदन किए गए हैं, जो अभी विचाराधीन हैं। किसी की भी मान्यता नहीं मिली है। अगर इस तरह से कार्रवाई की जाने लगी, तो पूरे प्रदेश के नशामुक्ति केंद्र बंद हो जाएंगे। आवेदन की प्रति भी संलग्न है। नर्सिंग एक्ट के तहत संचालनालय सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मध्यप्रदेश द्वारा 30 मार्च 2024 को समयसीमा निर्धारित की थी, जिसे आगामी आदेश तक शिथिल किया गया है, जिसका पत्र संलग्न है। चूंकि नर्सिंग एक्ट के पंजीयन सामाजिक न्याय की मान्यता के लिए आवश्यक है, इसीलिए सामाजिक न्याय की मान्यता भी शिथिल रखी गई है।
पहचान नशामुक्ति केंद्र जामगोद पर सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी संगीता यादव द्वारा हमारी संस्था पर तीन बार निरीक्षण किया गया है, जिसमें कोई कमीपूर्ति का पत्र द्वारा आदेश नहीं मिला। चौथी बार मैडम ने निरीक्षण किया था और उन्होंने कुछ कमी बताकर इसे पूर्ण करने की बात कही थी। इसके बाद कभी सेंटर पर निरीक्षण करने कोई दल नहीं आया।
25 जनवरी 2024 को कलेक्टर कार्यालय देवास से एक पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें विभागीय मान्यता के लिए दस दिनों में नवीन आवेदन की बात कही गई। इसके लिए भी हम आवेदन कर चुके हैं।
हमारे यहां 11 मरीज ऐसे थे, जिनके परिजन यहां भर्ती करा गए और दूसरी बार उन्हें लेने ही नहीं आए और न ही संपर्क करने पर जवाब दिया। ऐसे लोगों को हम 8-9 माह से नि:शुल्क रख रहे थे। इस मामले में हमने जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन को अवगत भी कराया था, किंतु वहां से भी कोई जवाब नहीं आया।
मुख्य बात तो यह है कि जैसा कि प्रेस नोट में लिखा गया है कि उक्त् सेंटर को बंद करने का आदेश दिया गया है, लेकिन ऐसा कोई आदेश हमें न तो लिखित या मौखिक रूप से प्राप्त हुआ है। हमारे द्वारा पूर्व में ही मानसिक तनाव तथा ब्लैकमेलिंग के कारण सेंटर को बंद किया जो चुका था।
देवास जिले में एकमात्र नशामुक्ति केंद्र था, जहां मरीज स्वास्थ्य लाभ लेते थे। इतना ही नहीं, मात्र 8 हजार रुपए के नाममात्र के शुल्क पर मरीजों को चाय-नाश्ता, भोजन, रहना, दवाई, डॉक्टर तथा परामर्श की सुविधा उपलब्ध थी, जो कि इतने कम दाम पर पूरे प्रदेश में कहीं भी उपलब्ध नहीं है।
चूंकि सुनील वर्मा तथा इनके साथियों द्वारा ब्लेकमेलिंग कर हमारी छवि धूमिल की गई है, इसीलिए हमारे द्वारा इनके विरुद्ध विधिवत मानहानि का नोटिस देकर कार्रवाई की जाएगी।
भवदी

