देवास (खुमान सिंह बैंस ) देवास जिले में कन्नौद अस्पताल को सिविल अस्पताल का दर्जा प्राप्त है। यहां पर स्वास्थ्य कर्मचारियों की संख्या एवं सुविधाएं भी अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की तुलना में अधिक है। ऐसी स्थिति में स्थानांतरण नीति को ताक में रखते हुए स्थानीय नेताओं के कहने पर कर्मचारियों को विशेष कर महिला नर्सिंग कर्मचारी को बागली सहित अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने का प्रयास विगत 10 दिनों से जारी है। जबकि मोहन सरकार कैबिनेट में 29 अप्रैल को ही स्थानांतरण नीति पर सहमति बनी है। इस नीति के तहत 20% से अधिक कर्मचारियों को इधर से उधर किया जा सकता है वह भी प्रभारी मंत्री की अनुशंसा पर लेकिन अस्पताल की व्यवस्था खराब करते हुए कर्मचारियों के स्थानांतरण के प्रयास किए जा रहे हे जिससे हाय वे स्थित हॉस्पिटल की नर्सिंग व्यवस्था गड़बड़ा सकती हे इस संबंध में कन्नौद सिविल अस्पताल के सी बी एमओ डॉक्टर परवेज मंसूरी से चर्चा की तो उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि 30% कर्मचारियों की कमी सिविल अस्पताल कन्नौद में है। ऐसे में यहां से 1 साल पूर्व आए कर्मचारियों को हटाना उचित नहीं है विशेष कर नर्सिंग स्टाफ को जिला चिकित्सा अधिकारी सरोजनी जेम्स मैं इस विषय पर बताया कि उनकी जानकारी में यह बात नहीं है हालांकि कुछ स्थानांतरण एक्षिक रूप से अल्पकालीन व्यवस्था के लिए किए जा रहे हैं और यदि अस्पताल की व्यवस्थाएं खराब होती है तो उन पर रोक लगाई जाएगी। अब देखना यह है कि अपने-अपने क्षेत्र के विधायक अस्पताल की व्यवस्था को सुधारने के लिए कर्मचारियों की संख्या बढ़ाते हैं या अपने अस्पताल के कर्मचारियों की संख्या घटाने में सहयोग करते हुए उनकी अनुशंसा करते हैं। नाम ना बताने की शर्त पर जिला अस्पताल के एक कर्मचारी ने बताया बड़े-बड़े नेता लोगों के फोन आने से इस प्रकार के बड़े खेल हो रहे हैं। वह बड़ी राशि लेकर कर्मचारियों का स्थानांतरण आदेश बनाकर चालाक तरीके से अधिकारियों की सहमति प्राप्त कर लेते हैं और जिले के जिले में ही कर्मचारियों को इधर से उधर करने का कारोबार वर्ष भर चालू रखते हैं। पूर्व विधायक एवं कांग्रेस के बड़े नेता कैलाश कुंडल ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी के शासन में लेनदेन लेकर वर्ष भर सभी प्रकार के काम चलाते रहते हैं चाहे स्थानांतरण नीति हो या जमीन की नप्ती या और अन्य कार्य कांग्रेस शासन काल में सभी कार्य समय पर ही संपन्न होते थे।

