बागली – पूरे भारतवर्ष में कई दिनों से गणपति उत्सव के संबंध में एक मैसेज प्रसारित किया जा रहा था । उक्त मैसेज के जरिए भक्तजनों को यह बताया जा रहा था कि प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी प्रतिमाएं नदियों एवं अन्य जलाशय को प्रदूषित करती है। इसके बदले श्रद्धालु इको फ्रेंडली गणपति यानी पर्यावरण सुरक्षित गणपति जो मिट्टी के बने होते हैं उनका उपयोग अपने पूजा स्थल पर करें और उन्हीं प्रतिमाओं की स्थापना 10 दिन के लिए करें। विसर्जन करते समय बड़ी नदी या जलाशय के स्थान पर घर के सामने ही विधि विधान से पूजा करते हुए इनका विसर्जन पानी के टब या अन्य बर्तन में करें। यह प्रतिमा गल कर मिट्टी बन जाए तो इसे गमले में उपयोग कर ले । इस पद्धति से प्रदूषण भी नहीं होगा और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा नदी जलाशय गंदे नहीं होंगे। भारत तिब्बत समन्वय संघ की प्रांत उपाध्यक्ष श्रीमती शोभा गोस्वामी द्वारा इस संदेश को अच्छे से समझाया था। नतीजा यह हुआ कि बागली के आसपास क्षेत्र में उनकी बात का अमल करते हुए अधिकतर श्रद्धालुओं ने इको फ्रेंडली गणपती बनाकर घर के सामने ही पानी से भरे बर्तन में विसर्जित किए। 10 दिवसीय गणेश उत्सव के बाद अनंत चतुर्दशी पर यह विसर्जन प्रक्रिया पूरे देश भर में जारी रही। श्रद्धा के साथ आरती पूजन कर घर में विराजित गणपति का विसर्जन होने पर दुख जरूर हुआ मान्यता अनुसार विसरजन के पूर्व प्रतिमा को पूरे घर आंगन में भ्रमण कराया गया मान्यता यह है कि ऐसा करने से घर में सुख शांति बनी रहती है और उनका आशीर्वाद बना रहता है। गणपति को प्रिय मोदक भोग लगाया गया और वहीं प्रसाद बाटी गई। बागली अनुविभागीय अधिकारी एस आर सोलकीं ने सभी समितियों से अपील की है कि वह विसर्जन करते समय सावधानी रखें गहरे जल से भरी नदी तालाब से दूरी बनाकर रखें बच्चों को विशेषकर पानी से दूर रखें और हनोनी घटनाओं से बचें।

