देवास(शाकिर अली दीप/खुमानसिंह बैस) रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति का सुन्दर स्वरुप और श्रेष्ठ संस्कार है…कंचन रिश्तों का पावन आधार है… भैया की शरारत बहन की मनुहार है… सावन की फुहार है… पूर्णिमा की चांदनी का जादुई संसार है और बहन भाई का अखण्ड प्यार है ।
रक्षाबंधन पर बहनों ने भाईयों की कलाई पर अपने स्नेह को रेशमी सूत्र के रुप मे बांधकर उनके जीवन मे सफलताओं ,सेहत और खुशियों की कामनाओं के साथ मंगल तिलक लगाकर, मिठाई खिलाकर रिश्तों की मिठास को ताज़गी से भर दिया ।
भाईयों ने भी अपनी लाड़ली बहनों को उपहार देकर उनकी सेवा,सुरक्षा के संकल्प को दोहराया । आवागमन के साधन बसें ,ट्रेन बन्द होने से बड़ी संख्या मे बहनें भाईयों से नहीं मिल पाईं तो कोरियर और डाक से अपना स्नेह भाईयों तक पहुंचाया ।
बाजारों मे त्योहार की रौनक कम दिखाई दी लेकिन पवित्र रिश्तों का उत्साह भरपूर दिखाई दिया । करणी सेना की देवास जिलाध्यक्ष रेखा बैस ने रक्षाबंधन की विशेषता और भाई के महत्व पर कहा की बीस वर्ष की बहन पांच साल के भाई को लेकर बाहर जाती है और खुद को सुरक्षित समझती है …यह है भाई के साथ का प्रमाण और महत्व ।
प्रेम,विश्वास और पावनता के इस मयूरपंखी पर्व को भारतीय संस्कृति से प्यार करने वाले परिवारों ने हर्षपूर्वक मनाया और समाजसेवियों ने अपनी तरह से ।
पत्रकारों ने कलम को रक्षा और सम्मान सूत्र बांधे और स्वयंसेवकों ने पेड़ पौधों को । जेलों मे बंद भाई इस बार बहनों से नहीं मिल पाये । जेल अधीक्षक रमेश आर्य ने बताया कि वायरस संक्रमण काल मे सुरक्षा कारणों से मुलाकात पर रोक है लेकिन राखी भाईयों तक पहुचा दी गई हैं । जल्दी ही बंदियों को विडियो काँल की सुविधा दी जा रही है ।
दुर्गा शक्ति सेना की राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्मला परमार ने रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जिस तरह बारिश से नदियों , झीलों और तालाबों सहित प्रकृति को नयी ताज़गी और जीवन मिलता है इसी तरह रक्षाबंधन पर्व भी बहन-भाई के रिश्तों मे नई ताज़गी और मिठास भरता है । हमे अपने रिश्तों , मातृभूमि ,संस्कृति और संस्कारों की सुरक्षा करनी चाहिये और इनसे प्रेम भी करना चाहिये । इसलिए कि ये बंधन तो प्यार का बंधन है….


