फौजी के परिवार की पेतृक जमीन को प्रशासन ने बताया सरकारी


डूब क्षेत्र की जमीन पर स्कूल का प्रस्ताव
 देवास। जिले की टोंक खुर्द तहसील के ग्राम चिड़ावद में खसरा नंबर 24.42 से 24.47 तक करीब 8 बीघा जमीन जिस पर भरत बौंदाजी, चरत बौंदाजी तथा सुमनबाई, यह परिवार  लगभग 100 वर्षों से खेती करते आ रहे हैं। इन लोगों के पास ग्वालियर स्टेट के संवत 1984 के कागज भी उपलब्ध है। लेकिन अचानक सीएम राइस स्कूल के लिए इनकी भूमि को चयनित किए जाने से इन किसानों में काफी रोष है। फौजी ईश्वर सिंह पटेल जो कि सीआरपीएफ में कश्मीर  पदस्थ है। उनका कहना है कि हमारे दादा, परदादा की जमीन को सरकारी बताकर कब्जा किया जा रहा है। इस जमीन पर ही 1964-65 में हमने तालाब भी खुदवा रखा है। सिंचाई विभाग हमारी जमीन को डूब में बता रहा है। तो फिर यहां स्कूल बनाने का क्या औचित्य? यहां की जमीन में पानी भरा रहता रहता है। इसलिए यहां पर हम केवल गेहूं की फसल ही करते हैं। तो यहां स्कूल भवन कैसा बनेगा यह विचारणीय पहलू है। चरत पटेल का कहना है कि तालाब खुदवाने के बाद भी हमें किसी प्रकार का आज तक मुआवजा नहीं मिला। अगर शासन जमीन लेता हैं तो हमें पूरा मुआवजा देना चाहिए। इस जमीन पर खेती कर रही विधवा लीलाबाई जाती मोची का भी कहना है कि हम खेती कर कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। अगर जमीन चली गई तो हमें भूखे मरने की नौबत आ जाएगी। भरत पटेल ने कहा कि 2014 से हमने हाईकोर्ट में केसा लगा रखा है जो कि विचाराधीन है। उनका यह भी कहना है कि स्कूल के लिए ग्राम में और भी पढ़त भूमि उपलब्ध है। लेकिन वहां दबंगों का कब्जा होने की वजह से प्रशासन भी वह हाथ नहीं डाल रहा है।