बार बार आगाह करने के बाद भी नहीं जागा जिला प्रशासन भृष्टाचार से परिपूर्ण बन चुका है राजस्व विभाग

देवास सन 2018 से सन2022तक आपदा वितरण राशि में किया भृष्टाचार को आडिट के बाद जिला कलेक्टर के संज्ञान में आने के बाद आठ पटवारी और एक सहायक ग्रेड तीन को दोषी मानते हुए निलंबित करने के आदेश दिए गये है। हमने पूर्व। कलेक्टर के कार्यकाल में हुए भृष्टाचार को प्रमुखता के साथ जिला प्रशासन के नवागत अधिकारियों के समक्ष रखा था किंतु इस पर ध्यान नहीं दिया और जब राजस्व विभाग की आडिट रिपोर्ट आई तो हमारी बातों की सत्यता की मोहर लग गई यह तो किसान का हक पर डाका डाला है अगर ग्राम पंचायत सचिवों की सही मायने मै जांच हो जाए तो जिले के अस्सी फीसदी सचिवों ने सरपंचों के साथ करोड़ों रुपए का भृष्टाचार किया है ।यह तो राजस्व विभाग की वानगी है कि किसानों की आपदा राशि से डेढ़ करोड़ रुपए की हेराफेरी की गई इसी विभाग की सही मायने में जांच हो जाए तो यह राशि अरबों रुपए में पहुंच जायेगी जहां सत्ता के मद में सरपंच से लेकर सरकारी महकमे के अनेक अधिकारी तक भृष्टाचार की राशि आई है।जनपद पंचायत के अधिकारियों से लेकर इंजिनियर तक भृष्टाचार की खैरात बंटती रही है जिसको मिडिया के माध्यम से उठाया भी गया पर तात्कालिक भृष्ट अधिकारियों की एक लंबी फौज बनी रही और उसके संरक्षक के रूप में विधानसभा के निर्वाचित प्रतिनिधि रहे हैं जो जिला प्रशासन पर दबाव डालकर उजागर हूए भृष्टाचार पर पर्दा डालते रहे हैं। आज भी जिला कलेक्टर आफिस में वह फाइल धूलि का रही है जिसमें मामला संज्ञान में आने के बाद जिला प्रशासन ने बसूली के आदेश दिए तो दुसरी तरफ राजनेताओंको के दबाव में फाइल ही गायब करा दी और वह भृष्टाचारी आज भी सीना तानकर बाजार में कहते फिर रहे हैं हमारा क्या बिगाड लिया जब तक नेताजी है हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड सकता हकीकत भी यही है जो जनमानस के सामने है।जिला कलेक्टर बदल गये तो क्या हुआ नीचे के तो वहीं अधिकारी और कर्मचारी हैं जिससे जिला कलेक्टर को काम कराना है। अगर राजस्व विभाग की सही मायनों में जांच हो गई तो शासन की कल्याणकारी योजना में दिया गया धन का अस्सी फीसदी धन लुटेरे का गये है । तभी तो नेताओं के आवभगत के समय जो खर्च होता है उसका भुगतान ठेकेदार करता है ।कन्नौद में मंत्री के कार्यक्रम में एक नेता की छाया ठेकेदार ने खर्च उठाने की बात चौराहे पर चल रही है जो ग़लत नहीं है ठेकेदार को लाख नहीं करोड़ों का रोड से लेकर सरकारी भवनों में घटिया काम को चौखा कार्य बताकर भुगतान जो होता रहा है। इसी ठेकेदार के आज भी दर्जनों कार्य आज भी अपूर्ण होने के बाद भी एक भी अधिकारी की कलम नहीं चलना इस बात का प्रमाण है।हाल ही खातेगांव विधानसभा क्षेत्र में बनी सड़कों की ही जांच करा लें जिला प्रशासन तो सच सामने आ जायेगा और ठेकेदार करोड़पति से सडकपति बन जायेगा हिम्मत चाहिए जिला प्रशासन को जो इमानदारी के साथ इस तरह के मामलों की जांच कर दोषी तो पर सख्त कार्रवाई कर सके‌