साथियों,
हम सब रूबरू होंगे अनिल तिवारी जी से जो महाराष्ट्र मुम्बई से निकलने वाले प्रसिद्ध दोपहर का सामना (सामना हिंदी) के कार्यकारी संपादक ह
अनिल तिवारी मुंबई में ही जन्मे, पढ़े और बढ़े, अनिल तिवारी अपने छात्र जीवन से ही सक्रिय समाज सेवा से जुड़े रहे हैं। आपकी कई सामाजिक व सांस्कृतिक संस्थाओं में प्रमुख सहभागिता है।
पिछले ३४ वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय अनिल तिवारी ने राजनीति, संसाधन विकास से लेकर सामाजिक क्षेत्र की पत्रकारिता की है। लिहाजा आपको 50 से ज्यादा प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। राजनीति पर आपकी गहरी पकड़ है। आप महाराष्ट्र विधानसभा को लगातार कवर करते रहे हैं। मंत्रालय पत्रकार संघ में बतौर कार्यकारिणी सदस्य के रूप में भी आपने सेवाएं दी हैं। आपने वर्ष २०१६ में ‘दोपहर का सामना’ के स्थानीय संपादक के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। लेखन, काव्य और व्यंग्य रचना में आपने अपनी अलग ही शैली विकसित की है। इन सबके बीच आपने राजनीति, संसाधन विकास, विशेषकर रेलवे और इन्फ्रास्ट्रक्चर में खासा अध्ययन किया है। संसाधन विषय में आपकी विशेष पकड़ के कारण ही आप २०१४ से अब तक लगातार भारतीय रेलवे की यूजर्स कमेटी में काम कर रहे हैं। आप बीएसएनएल की कमेटी पर भी हैं।

