देवास। वैसे तो देवास जिले में उप पंजीयक कार्यालयों में दलालों के माध्यम से तमाम प्रकार के उल्टे-सीधे काम हो रहे है, किंतु टोंकखुर्द तहसील में धोखाधड़ी के कई मामले उजागर हो चुके है। पिछले दिनों टोंकखुर्द तहसील के ग्राम आगरोद में फर्जी रजिस्ट्री का मामला उजागर हुआ था। जिसकी शिकायत पुलिस थाने से लेकर कलेक्टर तक हुई थी, किंतु कोई कार्यवाही नहीं हुई और अब इसी तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम बुधासा में फर्जी रजिस्ट्री करने का मामला सामने आया है। जिसमें एक कब्जेदार व्यक्ति ने भूमि के असली मालिक के समान नाम वाले अन्य किसान का आधार कार्ड लगाकर फर्जी रजिस्ट्री करवा ली। खास बात यह है कि रजिस्ट्री में विक्रेता के स्थान पर आधार कार्ड किसी अन्य का है और फोटो कब्जेदार व्यक्ति का लगा है। इतना ही नहीं फर्जी रजिस्ट्री कराने वाले व्यक्ति ने भूमि का डायवर्शन भी करवा लिया है और उस पर दो लोन भी ले लिये है। जब इस बात की जानकारी असल भूमि मालिक को लगी तो उन्होंने भौंरासा थाना पुलिस से लेकर कलेक्टर तक को शिकायत कर दी, किंतु लंबा समय बीत जाने के बाद भी पुलिस व प्रशासन ने कोई कार्यवाही नहीं की है। शिकायतकर्ता सज्जन सिंह पिता प्रहलाद सिंह सेंधव निवासी ग्राम बुधासा ने बताया कि उनके स्वामित्व की कृषि भूमि ग्राम बुधासा तहसील टोंकखुर्द में स्थित होकर भूमि सर्वे नं. 743 रकबा 1.1600 हेक्टेयर है। इस भूमि में से 520.44 वर्गमीटर भूमि अवैधानिक रूप से अजाब सिंह पिता भेरूसिंह सेंधव द्वारा अपने पुत्र के नाम से करवा ली गई है। शिकायतकर्ता ने बताया कि अजाब सिंह ने गांव के ही एक अन्य किसान सज्जनसिंह पिता प्रहलाद सिंह सेंधव का आधार कार्ड लगाकर मेरे स्वामित्व की 520.44 वर्गमीटर भूमि को अपने पुत्र गोपाल सिंह के नाम से विक्रय पत्र निष्पादित करवा लिया और गोपाल सिंह ने इस भूमि का डायवर्शन करवाने के साथ ही पुनावासा निजी फाइनेंस बैंक से गिरवी रखकर 7 लाख रुपये का लोन ले लिया और बाद में गोपाल सिंह ने इस भूमि में से 1800 वर्गफीट भूमि की रजिस्ट्री अपने भाई की पत्नी निशा के नाम पर कर दी और इस रजिस्ट्री के आधार पर निशा के नाम से नारदन आर्क केपिटल लिमिटेड से 8 लाख 76 हजार का ऋण प्राप्त कर लिया। जब इस बात की जानकारी असल किसान को लगी तो उन्होंने मय प्रमाण के भौंरासा थाने पर शिकायत की। साथ ही कलेक्टर को भी मामले से अवगत कराया, किंतु 8 माह बीत जाने के बाद भी इस मामले में न तो पुलिस ने कोई कार्यवाही की है और ना ही प्रशासन ने इस मामले में हस्तक्षेप किया है। लिहाजा किसान को अब दर-दर की ठोकरे खाना पड़ रही है।
फर्जीवाड़े में लिप्त है एक गिरोह, अधिकारी भी शंका के दायरे में
ग्रामीण क्षेत्र में इन दिनों फर्जी रजिस्ट्री व बैंक से लोन दिलाने के नाम पर एक बड़ा गिरोह काम रहा है, जिसमें बैंक से जुड़े दलाल, राजस्व विभाग के अधिकारी, उप पंजीयक कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी लिप्त है। जिसके सीधे प्रमाण बुधासा में हुई फर्जी रजिस्ट्री मामले में दिखाई दे रहे है। गौरतलब है कि रजिस्ट्री निष्पादन के कुछ घंटे बाद ही बैंकों द्वारा ऋण स्वीकृत कर दिया गया। जबकि सामान्य आदमी को रजिस्ट्री निष्पादन के दो दिन बाद उप पंजीयक कार्यालय से मूल रजिस्ट्री की प्रति मिलती है। वहीं बैंक से लोन लेने के लिए सामान्य व्यक्ति को महीनों चक्कर लगाना पड़ते है, लेकिन यहां तो रजिस्ट्री निष्पादन के कुछ घंटे बाद ही बैंक ने लोन स्वीकृत कर दिया। वहीं राजस्व विभाग ने भी डायवर्शन करने में देरी नहीं की। इससे साफ जाहिर होता है कि सबकुछ मिलीभगत से हो रहा है।

