देवास (खुमान सिंह बैस)। देवास मे पुलिस अधीक्षक डॉ . शिवदयालसिंह द्वारा अवैध के विरुद्ध अभियान मे अधिनस्थों की कार्रवाई औपचारिक ही दिखायी दे रही है वरना क्या कारण है की कुख्यात सटोरियों के अड्डे बरबाद और बन्द होने की अपेक्षा और अधिक फूल-फल रहे हैं ।
शहर के प्रमुख सट्टा क्षेत्र पत्तीबाजार मे यह कारोबार कभी बन्द ही नहीं होता । कभी किराये पर कभी पार्टनरी मे,कभी प्रतिस्पर्धा मे तो कभी खुद की सुरक्षा मे संचालित सट्टा अड्डों पर पहले तो पुलिस जाती ही नहीं और अगर किसी कारणवश छापा मारती भी है तो औपचारिक जप्ती और गिरफ्तारी कर आरोपियों को थाने से ही छोड़ दिया जाता है जो आकर फिर से सट्टा कारोबार मे सक्रिय हो जाते हैं ,
हां यहां यह भी उल्लेख किया जा सकता है कि पुलिस के हाथ सट्टा सरगना नहीं आते और मकान मालिक पर भी मेहरबानी बनी रहती है । तीन चार छापों के बाद भी पत्तीबाजार मे भाई के तीन चार ठिये चल रहे हैं । पुलिस सट्टा कारोबारियों के सामने शक्तिहीन नजर आ रही है और सट्टा संचालक शक्तिमान ।
उज्जैन रोड पर पुलिस की सहमति से, कुछ पुलिसकर्मियों के संवरक्षण मे वर्षों से जारी सट्टा कारोबार सदाबहार कहलाता है । कुछ अति भ्रष्ट यहां का कारोबार बन्द ही नहीं होने देते । उज्जैन रोड ब्रिज के नीचे के सटोरियों को भी अपनी आर्थिक शक्ति पर इतना घमंड है कि हमारा व्यपार कभी बन्द नहीं हो सकता ।
सवाल यह है कि कुछ चोर,लुटेरे पारदियों का सुराग देकर सटोरिया पुलिस का सहयोगी बन जाता है और पुरस्कार मे मिल जाती है सट्टा कारोबार की छूट?।
सटोरिये के दलाल पुलिस वाले वरिष्ठ अधिकारियों के सामने सटोरिये भाईयों की जमकर तारीफ करते हैं और उन्हे पुलिस का सहयोगी बताते हैं ।
यही कारण है कि पुल के नीचे झुग्गियों मे सट्टा बाजार आसानी से संचालित किया जाता है । 4 जुलाई को तीसरी बार पुलिस के छापे मे सटोरियों की गिरफ्तारी और 4400 रुपये की जप्ति इस बात का प्रमाण है कि ब्रिज के नीचे इसपार और उसपार के सफेदपोश सटोरियों को पुलिस का कोई भय नहीं है ।
ब्रिज के नीचे झुग्गियों मे रातदिन सट्टा कारोबार चिट्ठी पर्ची और हाजिर वर्ली के रुप मे चलता है । यही नहीं सटोरिये के घर तिलकनगर मे भी सटोरिये निडर होकर धंधा कर रहे हैं ।
ब्रिज के नीचे पुलिस से निडर होकर अपना कारोबार चला रहे सटोरियों द्वारा यह भी कहा जाता है कि वह डिमांड से अधिक रूपये बांटते हैं ।

